लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पास
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। नए कानून के तहत दोषियों को अधिकतम 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
विधेयक को लोकसभा में विपक्षी दलों के हंगामे और नारेबाजी के बीच मंजूरी दी गई। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पिछले सप्ताह छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर दिए गए बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था। यह विधेयक अब राज्यसभा में पारित होने के लिए भेजा जाएगा। इस कानून के तहत हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने का प्रावधान है। साथ ही जांच को दो महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
विधेयक में केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों पर ही नहीं, बल्कि संगठित पेपर लीक गिरोहों पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे संगठित सिंडिकेट पर अधिकतम ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह उन मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे जिन्हें उन्हें सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “वे माइक बंद कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की आवाज को नहीं दबा सकते।”
राहुल गांधी और सरकार के बीच तीखी बहस
विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीजेपी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग को मंजूरी दी थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर कार्रवाई की गई और कहा कि बल प्रयोग का आदेश केवल मंत्री या प्रधानमंत्री स्तर से दिया जा सकता है।
राहुल गांधी के इन आरोपों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनसे आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे। भाजपा और एनडीए सांसदों ने कांग्रेस नेता के आरोपों को निराधार बताया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान न तो गोलियां चलाई गईं और न ही फायरिंग का कोई आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
जितेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि गोली चलाने का आदेश पुलिस नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट दे सकता है। उन्होंने राहुल गांधी के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें अमित शाह के 30 गाड़ियों के काफिले के साथ आने की बात कही गई थी।
क्यों लाया गया यह विधेयक?
यह विधेयक नीट पेपर लीक मामले को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में हुए 36 दिनों तक चले देशव्यापी आंदोलन के बाद लाया गया है। यह आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल होने के बाद तेज हो गया था।
20 जुलाई को आंदोलन उस समय बड़ा मुद्दा बन गया, जब संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए, जिसमें छात्रों पर पेलेट गन इस्तेमाल करने का दावा भी शामिल था।
दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है, जबकि रैपिड एक्शन फोर्स से जुड़े आरोपों पर सीआरपीएफ की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, नीट पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने जैसी मांगें शामिल थीं।
