पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार सरकार से कड़ा सवाल पूछा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार सरकार से कड़ा सवाल पूछा कि जब दीपक प्रकाश पिछले छह महीने से अधिक समय से बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, तो उन्हें राज्य मंत्री के पद पर किस आधार पर बनाए रखा गया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ दीपक प्रकाश की बिहार के पंचायती राज मंत्री के रूप में दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि प्रकाश न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं, फिर भी उन्हें मंत्री पद पर बनाए रखा गया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश को मंत्री बने सात महीने और 22 दिन हो चुके हैं, लेकिन वे अब तक बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के लिए निर्वाचित नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि चाहे जवाब रिकॉर्ड पर हो या नहीं, अदालत मामले की सुनवाई करेगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी प्रश्न है, इसलिए अनावश्यक देरी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पीठ ने सरकार से पूछा, “जब कोई व्यक्ति निर्वाचित नहीं हुआ है, तो उसे छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बनाए रखा जा सकता है?” इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार के लिए निर्धारित कर दी।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री नियुक्त किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो मंत्री नियुक्त किया गया हो लेकिन विधानमंडल का सदस्य न हो, छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। ऐसा न होने पर वह मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है। इस आधार पर प्रकाश 20 मई 2026 के बाद मंत्री पद पर नहीं रह सकते थे।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि छह महीने की संवैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद भी दीपक प्रकाश ने चुनाव नहीं जीता, बल्कि उन्हें दोबारा मंत्री नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह पुनर्नियुक्ति करके छह महीने की नई अवधि शुरू करना संविधान की भावना और अनुच्छेद 164(4) के प्रावधानों के विपरीत है।
गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार, भारत के चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या दीपक प्रकाश अब भी मंत्री पद पर बने हुए हैं, जिस पर याचिकाकर्ता ने इसकी पुष्टि की थी।
अब बिहार सरकार, चुनाव आयोग और दीपक प्रकाश के जवाब दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर विस्तार से विचार करेगा कि क्या अनुच्छेद 164(4) के तहत किसी गैर-निर्वाचित मंत्री को छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद पुनः नियुक्त कर संवैधानिक सीमा को फिर से शुरू किया जा सकता है, या ऐसी पुनर्नियुक्ति संविधान के विरुद्ध है।
