दार्जिलिंग के पहाड़ों के मुद्दे पर केंद्र का बड़ा कदम, अमित शाह ने स्थायी राजनीतिक समाधान का दिया भरोसा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहाड़ियों के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र दार्जिलिंग हिल्स की समस्याओं का स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रस्तावित समझौते की संवैधानिक रूपरेखा और अन्य बिंदुओं को अंतिम रूप देने का काम करेगी।
अमित शाह ने यह बात पश्चिम बंगाल के पहाड़ी जिलों के विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कही। बैठक में पहाड़ी क्षेत्र के लोगों की समस्याओं, उनकी अलग पहचान की मांग, संवैधानिक दर्जे और राजनीतिक समाधान से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पंकज कुमार सिंह की अगुवाई में बनेगी समिति
केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित विशेष समिति की अध्यक्षता पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर और केंद्र के पहाड़ी मामलों के वार्ताकार पंकज कुमार सिंह करेंगे। यह समिति अंतिम समझौते की रूपरेखा और तौर-तरीकों पर काम करेगी। साथ ही प्रस्तावित समाधान तक पहुंचने के लिए रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी भी समिति की होगी। हालांकि, प्रस्तावित समझौते में क्या-क्या शामिल होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पहाड़ी लोगों की अन्य मांगों पर भी विचार का भरोसा
अमित शाह ने बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि पहाड़ी क्षेत्र के लोगों की अन्य मांगों पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इन उद्देश्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक में राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के अलावा कई प्रमुख पहाड़ी नेता भी मौजूद रहे। इनमें भाजपा सांसद राजू बिष्ट और हर्षवर्धन सिंगला, GNLF अध्यक्ष मन घीसिंग, GJM के पूर्व चेयरमैन बिमल गुरुंग, राज्य मंत्री विशाल लामा समेत कई विधायक और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
दशकों से चली आ रही है ज्यादा स्वायत्तता की मांग
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग दशकों से अधिक स्वायत्तता और संवैधानिक संरक्षण की मांग करते रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग सरकारों के साथ कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
ऐसे में अमित शाह की ओर से विशेष समिति गठित करने और संवैधानिक संदर्भ में अंतिम समझौते की रूपरेखा तैयार करने का ऐलान दार्जिलिंग हिल्स के लंबे समय से लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
