महिला आरक्षण पर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू आमने-सामने, परिसीमन को लेकर फिर बढ़ा विवाद
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: शनिवार को महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विवाद की शुरुआत रिजिजू की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने महिलाओं की अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर राहुल गांधी के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने की चुनौती दी। राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए सवाल किया कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र लगभग ठप पड़ा है। इसी बीच, रिजिजू पिछले कुछ दिनों से राहुल गांधी से लगातार संपर्क कर रहे हैं, ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को संसद से पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल किया जा सके। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। NDA के पास अकेले इतने सांसद नहीं हैं, इसलिए सरकार को विपक्ष के समर्थन की जरूरत है।
शनिवार को रिजिजू ने एक बार फिर राहुल गांधी से इस मुद्दे पर समर्थन की अपील की। इसके लिए उन्हें राहुल गांधी के उस वीडियो का सहारा मिला, जिसमें कांग्रेस नेता महिलाओं की अभिव्यक्ति की आज़ादी की वकालत करते नजर आ रहे थे।
रिजिजू ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं को लेकर सोच में “साफ बदलाव” दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताते हुए महिला आरक्षण बिल का “बिना किसी शर्त” समर्थन करने की अपील की।
रिजिजू ने कहा, “यह कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में साफ बदलाव दिख रहा है।”
हालांकि, रिजिजू के बयान के करीब दो घंटे के भीतर ही राहुल गांधी ने जवाब दे दिया। उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण बिल को कांग्रेस पहले ही पूरी तरह समर्थन दे चुकी है और यह कानून 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है।
राहुल गांधी ने कहा, “यह बिल पहले ही कांग्रेस के पूरे समर्थन से सर्वसम्मति से पास हो चुका है।”
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर कानून पहले ही पारित हो चुका है तो तीन साल बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया और अब इसे “बेवजह” परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। राहुल ने केंद्र सरकार से 2023 में पारित कानून को “बिना किसी शर्त” लागू करने की मांग की।
2023 में पारित हुआ था महिला आरक्षण कानून
महिला आरक्षण बिल, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है, 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इस कानून का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।
हालांकि, कानून में इसके लागू होने को भविष्य की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ दिया गया था। इसका मतलब था कि महिला आरक्षण को लागू होने में लंबा समय लग सकता है और इसकी वास्तविक शुरुआत 2034 के बाद तक खिंच सकती है।
अब सरकार की कोशिश है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। लेकिन सरकार द्वारा महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश ने विपक्ष की आपत्ति को फिर से सामने ला दिया है।
543 से बढ़कर 850 हो सकती हैं लोकसभा सीटें
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 किए जाने की बात सामने आई है। इनमें 33 प्रतिशत यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर है। उसका तर्क है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुपात में सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उन उत्तरी राज्यों को अधिक लाभ मिल सकता है जहां पिछले दशकों में जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक रही है। इसके विपरीत, दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है।
राहुल और रिजिजू के बीच लगातार हो रही बातचीत
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत पिछले कुछ दिनों से तेज हुई है। अप्रैल में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पारित कराने की सरकार की कोशिश सफल नहीं हो पाई थी। अब मॉनसून सत्र में सरकार ने एक बार फिर इसे आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू की है।
5 अगस्त को रिजिजू ने राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक बातचीत की थी। इस बातचीत का उद्देश्य परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक और संशोधित FCRA विधेयक के लिए समर्थन जुटाना था।
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना विपक्ष को स्वीकार्य नहीं है।
6 अगस्त को भी रिजिजू ने राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान राहुल ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर और अपने INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चा करेगी। इसके बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।
राहुल ने अमित शाह से भी मांगा बयान
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कुछ मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। इनमें जुलाई में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सरकार का बयान और राम मंदिर से जुड़े दान की कथित चोरी का मामला शामिल है।
अब मॉनसून सत्र के समाप्त होने में करीब एक सप्ताह ही बचा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण तथा परिसीमन के मुद्दे पर कोई सहमति बन पाएगी।
फिलहाल कांग्रेस अपने इस रुख पर कायम है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, सरकार इसे जल्द लागू करने के लिए संविधान संशोधन के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। आने वाले कुछ दिन इस गतिरोध को खत्म करने के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।
