महिला आरक्षण और परिसीमन पर SAD ने केंद्र का किया समर्थन, क्या फिर से होगा बीजेपी-अकाली दल का गठबंधन?
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की शुक्रवार को हुई मुलाकात के एक दिन बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। शनिवार को अकाली दल ने संसद में लंबित दो अहम संवैधानिक मुद्दों—महिला आरक्षण और प्रस्तावित परिसीमन—पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर दिया।
चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए और महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में उनका उचित प्रतिनिधित्व जल्द से जल्द मिलना चाहिए।
बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि शिरोमणि अकाली दल सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेता है, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों की वकालत की थी। उन्होंने यह भी कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पहले ही अपने सदन में महिलाओं के लिए आरक्षण देकर एक उदाहरण पेश कर चुकी है।
परिसीमन पर भी केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन
महिला आरक्षण के अलावा SAD ने लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के केंद्र के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है। पार्टी ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने के बजाय सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया।
बादल ने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन, दोनों प्रक्रियाएं तत्काल पूरी की जानी चाहिए।
SAD नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पार्टी पहले 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के खिलाफ थी। हालांकि, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में समान विस्तार के केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है।
चीमा के मुताबिक, अकाली दल ऐसी व्यवस्था चाहता है जो सभी राज्यों के लिए निष्पक्ष हो और संसद में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे।
पंजाब चुनाव से पहले अहम राजनीतिक घटनाक्रम
SAD का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि महिला आरक्षण और परिसीमन, दोनों ही मॉनसून सत्र के बचे हुए हिस्से में संसद के सामने आने वाले सबसे महत्वपूर्ण और विवादित मुद्दों में शामिल हैं।
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। साथ ही, लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन की प्रक्रिया के जरिए सदन की कुल सदस्य संख्या बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव है।
वहीं, दक्षिण भारत के कई विपक्षी दलों ने बढ़ती आबादी के आधार पर परिसीमन किए जाने का विरोध किया है। उनका तर्क है कि तमिलनाडु जैसे राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए उठाए गए प्रभावी कदमों की वजह से राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी शनिवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन का उद्देश्य संसद में तमिलनाडु की राजनीतिक आवाज को कमजोर करना है। उन्होंने देशभर के राजनीतिक दलों से इस प्रक्रिया का विरोध करने की अपील की।
इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन खबरों को खारिज किया है जिनमें 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत जारी है।
SAD के केंद्र के रुख के खुले समर्थन ने पंजाब की राजनीति में भी नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
क्या फिर साथ आएंगे BJP और SAD?
सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच एक बार फिर राजनीतिक नजदीकी की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
BJP और SAD लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के साथी रहे थे। दोनों दलों की करीब 24 साल पुरानी साझेदारी 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गई थी। हालांकि, अब दोनों नेताओं की मुलाकात ने संभावित राजनीतिक पुनर्मिलन की अटकलों को फिर हवा दे दी है।
गठबंधन की संभावनाओं पर सवाल पूछे जाने पर SAD नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, “मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि दोनों नेताओं की मुलाकात हुई है।”
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल की संभावित BJP-SAD गठजोड़ को लेकर टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए चीमा ने कहा, “यह AAP के डर को दिखाता है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या दोनों दलों के बीच गठबंधन पर विचार चल रहा है, तो चीमा ने कहा कि वह फिलहाल वही बात कहेंगे, जो पार्टी की बैठक में तय हुई है और उनका निजी रुख भी पार्टी के रुख के अनुरूप ही है।
दूसरी ओर, पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मुलाकात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी से भी मिलने के लिए उपलब्ध रहते हैं और संभावित गठबंधन को लेकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पंजाब चुनाव से पहले बदल सकते हैं सियासी समीकरण
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP सार्वजनिक रूप से लगातार कहती रही है कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
लेकिन शनिवार को महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर SAD द्वारा केंद्र सरकार के रुख का खुलकर समर्थन किए जाने के बाद पंजाब की राजनीति में एक नया आयाम जुड़ गया है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल के बीच बढ़ता संपर्क क्या केवल संसदीय मुद्दों तक सीमित रहेगा या फिर यह 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए BJP और SAD के बीच किसी नए राजनीतिक समझौते का रास्ता भी खोलेगा।
