तुलसीदास भारत की अमूल्य धरोहर, उनकी साहित्यिक प्रतिभा का दुनिया में कोई सानी नहीं: डॉ. सुधांशु त्रिवेदी

Tulsidas is an invaluable treasure of India; his literary genius is unparalleled in the world: Dr. Sudhanshu Trivedi.चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: महान संत, रामभक्त एवं कालजयी कवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर रविवार को दिल्ली के यमुना बाजार स्थित कथा पुंज पार्क में भव्य गोस्वामी तुलसीदास जयंती महोत्सव एवं शोभायात्रा का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।
अपने संबोधन में डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास भारत को प्राप्त हुई उन अनमोल विभूतियों में से एक हैं, जिनका देश के इतिहास, धर्म, साहित्य और संस्कृति पर अत्यंत व्यापक प्रभाव रहा है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी केवल भगवान श्रीराम के परम भक्त ही नहीं, बल्कि विश्व साहित्य के महानतम रचनाकारों में से एक थे। उनकी साहित्यिक प्रतिभा का उदाहरण विश्व स्तर पर मिलना अत्यंत कठिन है।

‘गोस्वामी’ एक सम्मानजनक उपाधि थी

डॉ. त्रिवेदी ने ‘गोस्वामी’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका संबंध संस्कृत के ‘गो’ और ‘स्वामी’ शब्दों से है। ‘गो’ का अर्थ इंद्रिय, वाणी अथवा गाय के रूप में लिया जाता है, जबकि ‘स्वामी’ का अर्थ स्वामी या नियंत्रण रखने वाला होता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में ‘गोस्वामी’ एक सम्मानजनक उपाधि के रूप में प्रयुक्त होता था।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी समाज की देश के इतिहास, धर्म, साहित्य और संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गोस्वामी तुलसीदास जी इस गौरवशाली परंपरा के ऐसे महामानव हैं, जिनकी रचनाओं ने भारतीय जनमानस को सदियों से प्रभावित किया है।

भारतीय साहित्य को विदेशी पैमाने से देखने पर उठाए सवाल

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने औपनिवेशिक मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन से ही भारतीयों को ऐसी अनेक बातें पढ़ाई जाती रही हैं, जिनमें हमारी अपनी महान साहित्यिक परंपरा को विदेशी मानकों के आधार पर परिभाषित किया गया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाकवि कालिदास जैसे महान भारतीय साहित्यकार को अक्सर ‘भारत का शेक्सपियर’ कहकर संबोधित किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य की अपनी अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। कालिदास और तुलसीदास जैसे महान साहित्यकारों को किसी विदेशी साहित्यकार के संदर्भ में परिभाषित करने के बजाय उनकी मौलिक प्रतिभा और भारतीय सांस्कृतिक योगदान के आधार पर समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी की रचनाओं में भक्ति, दर्शन, लोकजीवन, नैतिकता और भारतीय संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उनकी साहित्यिक विरासत आज भी समाज को दिशा और प्रेरणा प्रदान कर रही है।

भव्य शोभायात्रा में उमड़ा गोस्वामी समाज

अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा के तत्वावधान में आयोजित समारोह के दौरान गोस्वामी समाज के बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी के ओजस्वी संबोधन और ज्ञानवर्धक विचारों को उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक सुना।
कार्यक्रम में गोस्वामी समाज के डॉ. धनंजय गिरि, श्री शंकर गिरि, अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत सच्चिदानंद गिरि तथा महर्षि भृगु पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री गुरुजी गोस्वामी सुशील जी महाराज सहित समाज के अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
समारोह में पहुंचे अतिथियों का गोस्वामी तुलसीदास जयंती समारोह अभियान समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा प्रवक्ता डॉ. धनंजय गिरि, अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत सच्चिदानंद गिरि सहित महासभा के पदाधिकारियों ने गोस्वामी तुलसीदास जी का छायाचित्र एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया।

कथा पुंज पार्क से शुरू हुई शोभायात्रा

यह भव्य आयोजन 23 अगस्त 2026, रविवार को दिल्ली के यमुना बाजार स्थित कथा पुंज पार्क, मरघट वाले हनुमान जी मंदिर के निकट आयोजित किया गया। समारोह के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें रंग-बिरंगी झांकियों के साथ गोस्वामी समाज के हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शोभायात्रा कथा पुंज पार्क, यमुना बाजार से प्रारंभ होकर लोथियन पुल, लाल किला और जीपीओ होते हुए कोरिया पुल के निकट स्थित गोस्वामी तुलसीदास चौक पहुंची। यहां गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया, जिसके बाद शोभायात्रा का विधिवत समापन हुआ।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं और समाज के लोगों में उत्साह का माहौल रहा। भव्य झांकियों, धार्मिक जयघोष और बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती समारोह को विशेष बना दिया।

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