ट्रम्प के 50 प्रतिशत टैरिफ पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, ‘हम पर हमला हुआ’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा, “जब आप पर हमला होता है तो आप युद्ध की स्थिति में होते हैं, और हम पर हमला हुआ है।” उन्होंने 8 सितंबर से अमेरिकी सामानों पर “डॉलर-के-बदले-डॉलर” (बराबर मूल्य के) जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे दो पुराने सहयोगियों के बीच कड़वा व्यापार युद्ध और बढ़ गया।
कार्नी ने टीवी पर दिए भाषण में कहा कि कनाडा के जवाबी टैरिफ डेयरी, स्टील, घरेलू उपकरण, खेती के उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और पल्प-पेपर जैसे कई सेक्टरों में अमेरिकी सामानों पर लागू होंगे। दूसरी ओर, शनिवार की शुरुआत में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर कनाडा के अमेरिका को होने वाले सालाना निर्यात के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगा। इसमें हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर से लेकर औद्योगिक सामान तक शामिल हैं।
अपने 22 मिनट के भाषण में कार्नी ने कहा कि अगर वॉशिंगटन अपने लेवी (टैक्स) में काफी कमी करता, तो ओटावा अमेरिकी एल्युमीनियम, स्टील और मोटर वाहनों पर अपने मौजूदा जवाबी टैरिफ हटाने को तैयार था। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने प्रांतों को अमेरिकी शराब की बिक्री फिर से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने को भी तैयार था।
उन्होंने कहा, “लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा पेश की गई अंतिम शर्तें स्वीकार्य नहीं थीं। उन्होंने बहुत कुछ मांगा और बहुत कम पेशकश की। हम उनकी पेशकश स्वीकार नहीं कर सकते और न ही हम वह देंगे जो उन्होंने मांगा है। हम कनाडा की संप्रभुता से समझौता करने या अपने प्रमुख उद्योगों को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार नहीं थे।”
कार्नी ने कहा कि यह व्यापार युद्ध कनाडा और उसके दक्षिणी पड़ोसी के रिश्तों में एक बुनियादी बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा, “हमने शुरू से ही माना है कि अमेरिका बदल गया है। हम समझते हैं कि कभी-कभी, उनके हस्ताक्षर पेंसिल से लिखे होते हैं (यानी वे आसानी से बदल सकते हैं)।”
कनाडा के प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हम पुराने रिश्तों की ओर वापस नहीं जा रहे हैं।”
बातचीत का टूटना महज 48 घंटे पहले की स्थिति से बिल्कुल उलट था, जब दोनों पक्षों के अधिकारी वॉशिंगटन में तीन दिन की बातचीत के बाद किसी समझौते पर पहुंचने के करीब लग रहे थे। यह बातचीत कनाडा के अमेरिकी व्यापार मंत्री डोमिनिक लेब्लांक और जेमिसन ग्रीर के बीच हुई थी।
एक साल से अधिक समय तक बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके, जिसके कारण कार्नी ने बातचीत रोक दी और कनाडा की बातचीत करने वाली टीम को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। कार्नी ने कहा, “उन्होंने इन वार्ताओं के दौरान आखिरी मिनट तक कनाडाई लोगों के हितों की रक्षा के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है।”
उन्होंने वॉशिंगटन पर अंतिम चरण में अपनी प्रस्तावित शर्तों को बदलने का आरोप लगाया। कार्नी ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव में बाद में जोड़ी गई बातों से कनाडा में बनी कारों पर मिलने वाली टैरिफ छूट कम हो जाती, दूसरे देशों के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते करने की कनाडा की क्षमता सीमित हो जाती और राष्ट्रीय संप्रभुता, भाषा व संस्कृति से जुड़े सुरक्षा उपाय कमज़ोर पड़ जाते। उन्होंने इन शर्तों को अस्वीकार्य बताया।
