एक भिखारी ने कराया 45 मिनट तक मुख्यमंत्री और मंत्री को इंतजार

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: एक कहावत है इंतज़ार का फल मीठा होता है, लेकिन कभी कभी इंतज़ार करना बहुत कष्टदायक भी होता है। और ये भी परसेप्शन है कि सिर्फ याचक ही इंतज़ार करते है। जो समृद्ध है, सक्षम है, वो शायद ही इंतज़ार करते है। लेटलतीफी बड़े और सेलेब्रिटी होने की निशानी है। अक्सर ये खबर आती रहती है कि अमुख नेता या खिलाड़ी या फिर कोई फ़िल्मी सेलेब्रिटी कार्यक्रम में बहुत देर से पहुंचे। बॉलीवुड में तो देर से पहुँचने का एक तरह से प्रचलन है। कई ऐसे हीरो हेरोइन थे, हैं जिनकी लेटलतीफी बहुत ही मशहूर है। नेताओं के बारे में अक्सर ये धारणा बनती है कि वो तो कार्यक्रम में लेट ही आयेंगे। हालांकि कई ऐसे नेता हैं जो समय से अपने कार्यक्रम में पहुँच जाते हैं।

अब आप सोच रहे होंगें कि इतनी बड़ी भूमिका की क्या जरुरत। तो बात ये है कि एक भिखारी ने मुख्यमंत्री को मिलने के लिए कराया ४५ मिनट तक इंतज़ार और उस मुख्यमंत्री की सदाशयता देखिये, उन्होंने भी हंसी ख़ुशी उस इंतज़ार का लुत्फ़ उठाया। दरअसल मामला झारखण्ड का है, जहाँ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके साथी मंत्री मिथिलेश ठाकुर भीख मांगकर गुजारा करने वाले राजकुमार रविदास से मिलने के लिए 45 मिनट तक इंतजार करते रहे।

रविदास का गृह जिला हजारीबाग है, लेकिन करीब 4 साल पहले वह रांची आ गए और रिक्शा चलाकर अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। कुछ महीने पहले उनका रिक्शा चोरी हो गया, उसके बाद वे कूड़ा बिनकर गुजारा करने लगे। कूड़ा में मिले लोहे को वो कबाड़ी को बेचकर अपने परिवार का पालन कर रहे थे। अब कोरोना के कारण लॉकडाउन हो गया और कबाड़ी की दुकानें बंद हो गई हैं, जिसके चलते रविदास के सामने भूखमरी की नौबत आ गई।

अब रविदास के पास भीख मांगने के आलावा कोई उपाय नहीं बचा था। वो रांची के संत जेवियर कॉलेज के पास बैठकर भीख मांगने लगे। लॉकडाउन में उन्हें भीख भी नहीं मिल रही थी। जब स्थानीय मिडिया में रविदास की कहानी प्रकाशित हुई तो पेयजल एंव स्वच्छता मंत्री मिथलेश ठाकुर ने व्यक्तिगत कोष से एक रिक्शा खरीदा और मुख्यमंत्री के हाथों इसे रविदास को दिलाने का कार्यक्रम रविवार को रखा।
रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय से रविदास को सूचना दी गयी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें रिक्शा देने के लिए  बुलाया है, पहले तो रविदास को भरोसा नहीं हुआ, फिर वह जैसे तैसे सीएम आवास के बाहर पहुंच गए। रविदास को सीएम आवास तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लग गया और इसी वजह से देर हो गयी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री मिथलेश ठाकुर तक़रीबन 45 मिनट तक नया रिक्शा लेकर उसका इंतजार करते रहे। जब से ये घटना प्रकाश में आई है इसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। रविदास ने कहा रिक्शा मिलने के बाद कहा कि वैसे भी उन्हें भीख मांगना अच्छा नहीं लगता था, लेकिन मजबूरी में ऐसा कर रहे थे। अब रिक्शा चलाकर दोबारा मेहनत शुरू करेंगे और परिवार का पोषण करेंगे।

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