अमेरिका की अदालत ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर रिश्वत और धोखाधड़ी के आपराधिक आरोप खारिज किए

चिरौरी न्यूज
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को अमेरिका की अदालत से बड़ी राहत मिली है। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को ‘डिसमिस्ड विद प्रेजुडिस’ के साथ खारिज कर दिया है। इसके साथ ही करीब दो साल से चल रही आपराधिक कार्यवाही स्थायी रूप से समाप्त हो गई।
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदालत से फेडरल क्रिमिनल प्रोसीजर के Rule 48(a) के तहत आरोपपत्र खारिज करने की मांग की थी। जज निकोलस गारॉफिस ने अभियोजन पक्ष से मामले को वापस लेने के कारणों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण लेने के बाद इस अनुरोध को मंजूरी दी।
‘डिसमिस्ड विद प्रेजुडिस’ का क्या मतलब?
अदालत द्वारा मामले को ‘with prejudice’ खारिज किए जाने का अर्थ है कि इन आरोपों के आधार पर आपराधिक मामला दोबारा दर्ज नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह कोई फैसला नहीं दिया कि मूल आरोप सही थे या गलत।
मामला ट्रायल तक पहुंचने से पहले ही समाप्त हो गया। यानी इस मामले में किसी गवाह की अदालत में गवाही नहीं हुई, सबूतों की न्यायिक जांच नहीं हुई और आरोपों के मूल तथ्यों पर अदालत ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया।
नवंबर 2024 में लगा था आरोप
अमेरिकी अभियोजकों ने नवंबर 2024 में गौतम अदाणी, सागर अदाणी, विनीत जैन और अन्य लोगों पर आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपियों ने भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर करीब 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की साजिश रची थी।
अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना था, जिनसे करीब दो दशकों में 2 अरब डॉलर से अधिक का टैक्स के बाद मुनाफा होने का अनुमान था।
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि अदाणी समूह ने अमेरिकी बाजारों में लोन और बॉन्ड के जरिए 3 अरब डॉलर से अधिक जुटाए और इस दौरान निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह किया गया।
अदाणी ग्रुप ने शुरुआत से ही इन आपराधिक आरोपों को खारिज किया था और इन्हें निराधार बताते हुए कहा था कि समूह ने सभी लागू कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन किया है।
ट्रंप प्रशासन ने केस जारी रखने को बताया ‘न्याय के हित में नहीं’
अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत के सामने कहा कि इस मामले को आगे जारी रखना अब न्याय के हित में नहीं है। सरकार ने इसके पीछे कई कारण गिनाए, जिनमें अधिकार क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां, सबूतों से संबंधित समस्याएं और कथित घटनाओं का मुख्य रूप से भारत में होना शामिल था।
DOJ ने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारियों ने मामले की जांच की थी और किसी निवेशक के वास्तविक नुकसान की पहचान नहीं की गई थी। सरकार ने व्यापक जनहित से जुड़े पहलुओं का भी हवाला दिया।
न्याय विभाग ने यह भी दावा किया कि नवंबर 2024 में, तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के अंतिम दिनों में सार्वजनिक किया गया आरोपपत्र ट्रायल तक पहुंचने की वास्तविक संभावना नहीं रखता था और यह तत्कालीन प्रशासन की ओर से राजनीतिक रूप से प्रेरित ‘नाम लेकर बदनाम करने‘ की कार्रवाई जैसा प्रतीत होता था।
जज निकोलस गारॉफिस ने सरकार की दलीलों की समीक्षा की। अदालत ने सरकार द्वारा पेश किए गए कई आधारों को अपर्याप्त माना, लेकिन एक महत्वपूर्ण आधार को स्वीकार किया।
अदालत ने माना कि अदाणी ग्रीन की एंटी-ब्राइबरी नीतियों और कॉरपोरेट अनुपालन से संबंधित कुछ कथित बयानों को ‘inactionable puffery’ माना जा सकता है। यानी ऐसे व्यापक दावे, जिन पर निवेशकों से उचित रूप से भरोसा करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
अदालत ने सरकार की उस दलील को पर्याप्त नहीं माना कि कथित गतिविधियां लगभग पूरी तरह भारत में हुई थीं और इसलिए अमेरिकी सिक्योरिटीज कानून के अधिकार क्षेत्र से जुड़े गंभीर सवाल पैदा होते हैं। अदालत ने कहा कि अभियोग में खुद यह आरोप था कि निवेशकों ने अमेरिका में धन लगाया और लेन-देन अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से जुड़ा था।
हालांकि, अदालत ने कहा कि ‘puffery’ से संबंधित आधार तीनों आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त था, इसलिए अन्य मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष देना जरूरी नहीं था।
गौतम अदाणी ने फैसले का किया स्वागत
फैसले के बाद गौतम अदाणी ने इसे विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर के दौरान उनका भरोसा सत्य, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा।
उन्होंने उन लोगों का आभार जताया जिन्होंने अदाणी परिवार, न्याय व्यवस्था और भारत की न्याय क्षमता पर विश्वास बनाए रखा। अदाणी ने कहा कि उनका समूह देश के लिए निर्माण, दीर्घकालिक मूल्य सृजन और बड़े उद्देश्य के साथ काम करता रहेगा।
अदालत ने मांगे थे शपथपत्र
मामला खारिज करने की मंजूरी देने से पहले जज गारॉफिस ने DOJ को सार्वजनिक रूप से यह बताने का निर्देश दिया था कि वह अभियोजन समाप्त क्यों करना चाहता है। अदालत ने आरोपियों से शपथपत्र भी दाखिल करने को कहा था, जिसमें उन्हें यह पुष्टि करनी थी कि मामले को खारिज करने के फैसले के बदले किसी तरह का वादा, प्रस्ताव, ‘quid pro quo’ या कोई छिपा हुआ समझौता नहीं हुआ है।
गौतम अदाणी ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि DOJ के फैसले से संबंधित कोई वादा, प्रस्ताव, लेन-देन या अघोषित समझौता नहीं हुआ था। सरकार की दलीलों और आरोपियों के शपथपत्रों की समीक्षा के बाद अदालत ने मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया।
जज ने यह भी कहा कि नवंबर 2024 में अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की अदाणी की घोषणा ने DOJ के मामले वापस लेने के फैसले में कोई भूमिका नहीं निभाई।
अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की ओर से चल रही अलग सिविल कार्रवाई भी अंतिम फैसले के जरिए निपट गई है। इस मामले में गौतम अदाणी ने आरोपों को स्वीकार किए बिना अदालत के आदेश पर सहमति दी। अंतिम आदेश के तहत उन्हें SEC को 60 लाख डॉलर (USD 6 million) का सिविल जुर्माना 30 दिनों के भीतर चुकाना होगा।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी वैश्विक जांच
अदाणी समूह के खिलाफ यह मामला जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद बढ़ी वैश्विक जांच के बीच सामने आया था। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी और अपने सबसे निचले स्तर पर समूह का बाजार मूल्य 150 अरब डॉलर से अधिक घट गया था।
अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग के आरोपों को भी लगातार खारिज किया और कहा कि उसने सभी लागू कानूनों तथा डिस्क्लोजर संबंधी नियमों का पालन किया है।
अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक मामला ‘with prejudice’ खारिज किए जाने के साथ गौतम अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ यह आपराधिक कार्यवाही अब ट्रायल के बिना ही समाप्त हो गई है।
