बीजिंग-वॉशिंगटन शिखर वार्ता से पहले चीन ने “चार रेड लाइन्स” दोहराईं
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बीजिंग ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की चीन यात्रा से ठीक पहले दोनों देशों के संबंधों को लेकर अपनी सख्त स्थिति दोहराई है। चीनी दूतावास (Chinese Embassy in the United States) ने कहा है कि चीन–अमेरिका संबंधों में “चार रेड लाइन्स” हैं, जिन्हें किसी भी हाल में पार नहीं किया जाना चाहिए।
इन चार संवेदनशील मुद्दों में शामिल हैं—ताइवान मुद्दा, लोकतंत्र और मानवाधिकार, राजनीतिक प्रणाली और विकास का रास्ता, तथा चीन के विकास के अधिकार।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि चीन और अमेरिका को “रणनीतिक, रचनात्मक और स्थिर संबंध” बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि “आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और जीत-जीत सहयोग” ही दोनों देशों के बीच सही रास्ता है।
ताइवान को लेकर चीन का कड़ा रुख
चीन का कहना है कि ताइवान उसका अभिन्न हिस्सा है, जबकि ताइवान एक लोकतांत्रिक रूप से स्वशासित क्षेत्र है। इसी मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
शी जिनपिंग (Xi Jinping) की सरकार ने फिर दोहराया कि ताइवान के साथ अमेरिका की सैन्य साझेदारी और हथियारों की बिक्री का वह कड़ा विरोध करती है।
वहीं, जो बाइडेन (Joe Biden) प्रशासन के समय अमेरिका ने ताइवान के लिए लगभग 11 अरब डॉलर का हथियार पैकेज घोषित किया था, जिसे अब तक का सबसे बड़ा रक्षा पैकेज बताया गया।
अमेरिका आधिकारिक तौर पर “वन चाइना पॉलिसी” के तहत ताइवान की संप्रभुता पर कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लेता, लेकिन ताइवान की रक्षा के लिए उसे समर्थन देता है। चीन ने अमेरिका पर मानवाधिकार और लोकतंत्र के नाम पर उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। साथ ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले राजनीतिक ढांचे का भी बचाव किया गया है। इसके अलावा, रेयर अर्थ निर्यात नियंत्रण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रतिस्पर्धा और व्यापार विवाद भी दोनों देशों के बीच बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
ट्रंप की चीन यात्रा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंच रहे हैं। यह उनकी 2017 के बाद पहली चीन यात्रा है। इस दौरे में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी और एक भव्य राजकीय भोज व चाय बैठक भी शामिल है।
हालांकि, इस बार ट्रंप का एजेंडा पहले की तुलना में सीमित बताया जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से सोयाबीन, बीफ और बोइंग विमानों से जुड़े समझौते शामिल हो सकते हैं।
