कॉमनवेल्थ गेम्स: अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास, भारत को जूडो में मिले पहले दो स्वर्ण पदक

Commonwealth Games: Asmita Dey and Harsh Singh make history; India wins its first two gold medals in judo.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में शुक्रवार का दिन भारतीय जूडो के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। 1990 में जूडो को खेलों में शामिल किए जाने के बाद पहली बार भारत ने इस खेल में स्वर्ण पदक जीते। 23 वर्षीय अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को जूडो के पहले दो स्वर्ण पदक दिलाए, जबकि यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीतकर भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ अभियान को और यादगार बना दिया।

इससे पहले भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में कुल 11 पदक (5 रजत और 6 कांस्य) जीते थे, लेकिन स्वर्ण पदक का इंतजार 36 वर्षों तक कायम था।

पिता की याद में अस्मिता डे का ऐतिहासिक गोल्ड

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली अस्मिता डे की सफलता बेहद भावुक रही। सात महीने पहले उनके पिता का ब्रेन स्ट्रोक के कारण निधन हो गया था। त्रिपुरा में साइकिल मैकेनिक रहे उनके पिता प्रतिदिन लगभग 300 रुपये कमाकर परिवार चलाते थे और कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने में हरसंभव मदद करते थे।

पिता के निधन के बाद अस्मिता ने जूडो छोड़ने का फैसला कर लिया था, लेकिन उनकी मां ने उन्हें दोबारा अभ्यास शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उनकी मां ने कहा था, “अगर आज मैं तुम्हें रोक दूंगी, तो तुम्हारे पिता को लगेगा कि मैं उनके सपनों को तोड़ रही हूं।”

ग्लासगो पहुंचने से पहले अस्मिता लगातार मानसिक दबाव और अनिद्रा से जूझ रही थीं। उन्होंने कहा, “भारत में मैं रातभर जागती रहती थी और मुकाबलों के बारे में सोचती रहती थी। यहां आने के बाद भी काफी घबराहट थी, लेकिन मेरे मन में सिर्फ एक ही बात थी कि मुझे सबको हराकर गोल्ड जीतना है।”

फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच के खिलाफ अस्मिता ने शानदार वापसी की। शुरुआती बढ़त गंवाने के बावजूद उन्होंने मुकाबला बराबरी पर लाया और गोल्डन स्कोर में निर्णायक युको हासिल कर 2-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

हर्ष सिंह ने ओलंपियन को हराकर जीता स्वर्ण

अस्मिता की जीत के कुछ ही देर बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ओलंपियन जोशुआ कैट्ज़ को हराकर भारत के लिए दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया।

पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखने वाले हर्ष ने मुकाबले के अंतिम 41 सेकंड में शानदार वाजा-अरी स्कोर किया और फिर अंत तक अपनी बढ़त कायम रखते हुए बड़ा उलटफेर कर दिया।

जीत के बाद हर्ष ने कहा, “इतने बड़े मंच पर मेरी वजह से राष्ट्रगान बजना बेहद खास एहसास है। मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करता हूं। दबाव जरूर था, लेकिन मेरे परिवार और सीनियर्स ने कभी उसे महसूस नहीं होने दिया।”

यामिनी मौर्य ने जीता रजत

महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में भारत की यामिनी मौर्य स्वर्ण पदक से बेहद करीब पहुंचीं, लेकिन इंग्लैंड की एसेल्या टॉप्राक के खिलाफ सात मिनट तक चले कड़े मुकाबले में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

चार मिनट के नियमित समय के बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा, जहां अतिरिक्त समय में तीसरा शिडो (पेनल्टी) मिलने के कारण यामिनी को अयोग्य घोषित कर दिया गया और उन्हें रजत पदक मिला।

भारत का जूडो दल अब तक दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर इतिहास रच चुका है। शनिवार को उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा) और करणजीत सिंह मान (पुरुष 90 किग्रा) भी मुकाबलों में उतरेंगे। भारतीय दल को उनसे भी पदक की उम्मीद है।

भारतीय जूडो के लिए यह अभियान अब तक का सबसे सफल प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसने वर्षों से चले आ रहे स्वर्ण पदक के इंतजार को खत्म कर नया इतिहास रच दिया।

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