WTA की नई सेक्स-टेस्टिंग नीति पर विवाद, स्पोर्ट एण्ड राइट अलायंस ने बताया भेदभावपूर्ण

Controversy over WTA's new sex-testing policy; Sport and Rights Alliance terms it discriminatory.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: महिला टेनिस में खिलाड़ियों की पात्रता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्पोर्ट एण्ड राइट अलायंस ने महिला टेनिस संघ (WTA) से अपनी नई सेक्स-टेस्टिंग नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। संगठन ने इस नीति को भेदभावपूर्ण बताते हुए आशंका जताई है कि इससे महिला टेनिस खिलाड़ियों पर कलंक लग सकता है और उन्हें मानसिक आघात का सामना करना पड़ सकता है।

WTA ने पिछले महीने अपनी नई नीति लागू की थी, जिसके तहत महिला वर्ग में खेलने की पात्रता के लिए खिलाड़ियों को SRY जीन की एक बार आनुवंशिक जांच करानी होगी। यह जीन जैविक लिंग निर्धारण से जुड़ा माना जाता है। जांच गाल के अंदर से लिए गए स्वैब या ब्लड सैंपल के जरिए की जा सकती है और WTA टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए इसे अनिवार्य किया गया है।

WTA की नीति में बड़ा बदलाव

नई व्यवस्था WTA की पिछली नीति से काफी अलग है। पहले ट्रांसजेंडर महिला खिलाड़ी अपनी पहचान महिला के तौर पर घोषित करने और निर्धारित सीमा के भीतर कम से कम दो साल तक टेस्टोस्टेरोन स्तर बनाए रखने की शर्त पूरी करने के बाद महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर सकती थीं।

रॉयटर्स के अनुसार, जुलाई में उस समय पेशेवर टेनिस के किसी भी स्तर पर किसी ज्ञात ट्रांसजेंडर महिला खिलाड़ी के प्रतिस्पर्धा करने की जानकारी नहीं थी।

नई नीति को लेकर स्पोर्ट एण्ड राइट अलायंस की कार्यकारी निदेशक एंड्रिया फ्लोरेंस ने WTA की दलीलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भले ही WTA का नुकसान पहुंचाने का इरादा न हो, लेकिन सेक्स-टेस्टिंग के कारण होने वाले संभावित कलंक और मानसिक आघात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

फ्लोरेंस के मुताबिक, अच्छे इरादे महिलाओं और लड़कियों को सेक्स-टेस्टिंग से होने वाले संभावित नुकसान और सामाजिक कलंक को खत्म नहीं कर सकते।

Controversy over WTA's new sex-testing policy; Sport and Rights Alliance terms it discriminatory.
(pic credit: French Open)

सबालेंका ने किया नीति का समर्थन

WTA की नई नीति ने खिलाड़ियों के बीच भी अलग-अलग राय पैदा कर दी है। दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी आर्यना सबालेंका ने इस कदम का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है। कनाडियन ओपन के दौरान सबालेंका ने कहा कि महिला टेनिस में प्रतिस्पर्धात्मक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जैविक अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि वह WTA के इस फैसले का समर्थन करती हैं और अगर सभी खिलाड़ियों की जांच की जाती है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।

सबालेंका ने यह भी कहा कि उनका ध्यान अपने खेल और लक्ष्यों पर है और अगर सभी खिलाड़ियों के लिए टेस्टिंग समान रूप से लागू होती है, तो वह इसे निष्पक्ष व्यवस्था मानती हैं।

वहीं, अमेरिकी स्टार कोको गॉफ ने इस मुद्दे पर अधिक संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने महिला खेलों में निष्पक्षता की रक्षा करने के तर्क को समझने की बात कही, लेकिन साथ ही चिंता जताई कि ऐसी नीति ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ नकारात्मक माहौल को बढ़ावा दे सकती है। इस तरह WTA की नीति ने महिला टेनिस में प्रतिस्पर्धात्मक निष्पक्षता, खिलाड़ियों के अधिकार और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के प्रति व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

IOC के फैसले के बाद बढ़ी बहस

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भी महिला वर्ग में पात्रता को लेकर नियमों पर चर्चा तेज है। मार्च में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने फैसला किया था कि ओलंपिक में महिला स्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाली जैविक महिला खिलाड़ियों के सेक्स का निर्धारण एक बार की जाने वाली जांच के जरिए किया जाएगा।

WTA का कहना है कि उसकी नई स्क्रीनिंग व्यवस्था के साथ खिलाड़ियों की गोपनीयता और डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय भी किए जाएंगे। हालांकि, Sport & Rights Alliance का मानना है कि केवल गोपनीयता और डेटा-प्राइवेसी के इंतजाम उसकी मूल चिंताओं का समाधान नहीं करते। संगठन का कहना है कि सेक्स-टेस्टिंग अपने आप में खिलाड़ियों को कलंकित करने और उनके साथ भेदभाव का जोखिम पैदा कर सकती है। अब दबाव WTA पर है कि वह अपनी नई नीति की समीक्षा करता है या मौजूदा व्यवस्था को ही आगे जारी रखता है। फिलहाल, महिला टेनिस में यह मुद्दा खेल की निष्पक्षता और खिलाड़ियों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर सबसे विवादास्पद बहसों में शामिल हो गया है।

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