“सुरक्षा संबंधी चिंताओं” की वजह से फिल्म सतलुज OTT से हटाई गई: सूत्र
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सरकारी सूत्रों ने सोमवार को बताया कि सरकार ने OTT प्लेटफ़ॉर्म ZEE5 को निर्देश दिया कि वह दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म ‘सतलुज’ को हटा दे। सरकार ने इसके लिए “सुरक्षा संबंधी चिंताओं” और IT नियम 2021 के तहत “ज़िम्मेदारियों” का हवाला दिया। यह तब हुआ जब पंजाब की राजनीतिक पार्टियों और सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने फ़िल्म को रिलीज़ करने की मांग की थी, और एक्टर-सिंगर ने लोगों से कहा था कि वे इसे जहाँ और जैसे भी हो, देखें। शुक्रवार को ZEE5 पर बिना किसी कट के रिलीज़ हुई इस फ़िल्म को रविवार शाम प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया।
एक सरकारी सूत्रों ने बताया कि ‘सतलुज’ के मेकर्स ने 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के पास इसके ओरिजिनल टाइटल ‘पंजाब ’95’ के साथ सर्टिफ़िकेट के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उन्होंने सेंसर बोर्ड के सुझाए गए 127 कट को नहीं माना और फ़िल्म की रिलीज़ रोक दी।
सूत्र ने कहा, “वे सुझाए गए कट पर कोई फ़ैसला नहीं ले रहे थे और आख़िरकार उन्होंने चुपचाप OTT पर नए टाइटल के साथ फ़िल्म रिलीज़ कर दी। OTT, CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। जब यह मामला सरकार के ध्यान में आया, तो ज़ी (Zee) से फ़िल्म को हटाने के लिए कहा गया। यह निर्देश सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण दिया गया था। OTT प्लेटफ़ॉर्म से इंटरमीडियरी गाइडलाइंस के तहत ज़िम्मेदारियों का पालन करने के लिए कहा गया था। अगर वे थिएटर और OTT पर फ़िल्म रिलीज़ करना चाहते हैं, तो उन्हें तय नियमों का पालन करना चाहिए।”
ध्यान देने वाली बात है कि OTT कंटेंट सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के दायरे में नहीं आता है और इसे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के पार्ट III के प्रावधानों के तहत रेगुलेट किया जाता है।
‘सतलुज’ फ़िल्म पंजाब में एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर आधारित है। यह फ़िल्म 1990 के दशक के उस अशांत दौर की कहानी है जब राज्य आतंकवाद से जूझ रहा था। यह फ़िल्म तीन साल से ज़्यादा समय तक सेंसर के पास अटकी रही थी।
