अमेरिका के ताजा हमलों के बाद ईरान का पलटवार, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा

चिरौरी न्यूज
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले करने का दावा किया है। यह फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान की सबसे बड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी सेना के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, गोला-बारूद भंडार और रडार ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया गया।
IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो ईरान पहले से कहीं अधिक कड़ा जवाब देगा। संगठन ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता की जिम्मेदारी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर होगी।
ओमान, बहरीन, कतर और जॉर्डन में भी हमलों का दावा
ईरान ने दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने ओमान के दुक्म (Duqm) बंदरगाह पर अमेरिकी विमानवाहक पोतों को सहायता देने वाले ठिकानों और ईंधन आपूर्ति केंद्रों पर भारी हमला किया।
इसके अलावा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस, कतर के अल उदैद एयर बेस और जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस को भी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया गया। ईरान के अनुसार, इन हमलों में लड़ाकू विमानों के रखरखाव केंद्र, कमांड एवं कंट्रोल सुविधाएं, संचार प्रणाली तथा गोला-बारूद भंडार को नुकसान पहुंचा।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए हमले
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने लड़ाकू विमानों, नौसैनिक जहाजों, आत्मघाती ड्रोन और मानवरहित समुद्री प्रणालियों की मदद से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
अमेरिका के अनुसार, इन हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, तटीय रडार, मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन क्षमताओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तेज रफ्तार नौकाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा होने वाले खतरे को कम करना था।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि उनकी सेना ने ईरान की एक क्रूज मिसाइल और एक हमलावर ड्रोन को मार गिराया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम उन्हें करारा जवाब दे रहे हैं।”
खाड़ी देशों में बढ़ा सुरक्षा संकट
ईरान के जवाबी हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
- कतर ने बताया कि हमले के दौरान गिरे मलबे से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हुए।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को बीच रास्ते में ही रोक दिया।
- बहरीन ने भी कई हवाई हमलों को निष्क्रिय करने का दावा किया।
- जॉर्डन ने मिसाइल हमलों की पुष्टि की, जबकि ओमान ने ड्रोन हमलों की जानकारी दी।
- कुवैत ने बताया कि एक तेल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर हमला होने से एक कर्मचारी घायल हुआ।
होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव
लगातार बढ़ते संघर्ष के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव गहरा गया है।
ईरान ने हाल ही में “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” का गठन किया है और दावा किया है कि उसकी अनुमति के बिना जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना स्वीकार नहीं किया जाएगा। रविवार को ईरानी प्राधिकरण ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण फिलहाल होरमुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही संभव नहीं है। हालांकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है और ईरान इस जलमार्ग को नियंत्रित नहीं करता।
बातचीत पर भी मंडराया संकट
ताजा सैन्य टकराव के बाद पिछले महीने हुए अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करना और आगे की वार्ता का रास्ता खोलना था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर आक्रामक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि वॉशिंगटन के दबाव के कारण मस्कट में प्रस्तावित वार्ता विफल हो गई।
वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, “एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है। हमने पहले ही कहा था कि या तो अपना वादा निभाइए, या इसकी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहिए।” पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
