ज्ञानवापी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पहल, समझौते की कोशिश के लिए स्पेशल लोक अदालत भेजा मामला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित धार्मिक विवादों में शामिल वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम पहल की है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को ‘समाधान समारोह-2026’ (Samadhan Samaroh-2026) पहल के तहत स्पेशल लोक अदालत को भेज दिया है, ताकि हिंदू और मुस्लिम पक्ष आपसी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान तलाश सकें।
सुप्रीम कोर्ट की यह पहल अदालत की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम “Supreme Court Action for Mediated Adjudication and Disputes Harmonization Across Nation (SAMADHAN SAMAROH)” का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालना है।
21 से 23 अगस्त तक बैठेगी स्पेशल लोक अदालत
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, ज्ञानवापी विवाद पर 21, 22 और 23 अगस्त को स्पेशल लोक अदालत में सुनवाई होगी। इससे पहले 14 जुलाई को वाराणसी में प्री-कॉन्सिलिएशन (पूर्व सुलह) बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाएं तलाशने का प्रयास किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने उम्मीद जताई है कि लोक अदालत के माध्यम से होने वाली बातचीत दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने और सहमति आधारित समाधान का रास्ता खोल सकती है।
ज्ञानवापी मस्जिद-काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर से जुड़ा विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है और इसे देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक एवं कानूनी मामलों में गिना जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद भी शामिल
सुप्रीम कोर्ट की सुलह प्रक्रिया केवल ज्ञानवापी तक सीमित नहीं है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े विशेष अनुमति याचिका (SLP) मामलों को भी समाधान समारोह-2026 के तहत स्पेशल लोक अदालत को भेजा गया है।
हालांकि, मथुरा मामले में सुलह की पहली कोशिश सफल नहीं हो सकी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि उपस्थित हुए, जबकि मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इसके चलते सुलह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और इसे असफल घोषित कर दिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं कई मुकदमे
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के एक वादी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस विवाद से जुड़े करीब 18 मुकदमे फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान की मांग करते हुए सात विशेष अनुमति याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं, जिसके बाद मामले को लोक अदालत के लिए भेजा गया।
संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद में भी नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की इस पहल के तहत संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद में भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। अदालत का उद्देश्य ऐसे संवेदनशील और लंबे समय से लंबित धार्मिक विवादों को टकराव के बजाय संवाद और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रयास करना है।
हालांकि, किसी भी विवाद का समाधान तभी संभव होगा जब दोनों पक्ष स्वेच्छा से बातचीत की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हों। ऐसे मामलों को स्पेशल लोक अदालत के दायरे में लाना सुप्रीम कोर्ट की ओर से सहमति आधारित समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
