केरल में जला लालू की लालटेन, कुथुपरम्बा क्षेत्र से RJD उम्मीदवार पीके प्रवीण ने जीत दर्ज की
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सोमवार को घोषित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। इनमें से केवल केरल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को स्पष्ट सफलता मिली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रहा है। इस जीत के साथ ही राज्य में पिछले दस वर्षों से जारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) की सरकार का अंत हो गया है, जिसका नेतृत्व पिनराई विजयन कर रहे थे। इस परिणाम के बाद देश में फिलहाल किसी भी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार नहीं रह गई है।
हालांकि इन नतीजों के बीच एक चौंकाने वाला पहलू भी सामने आया। लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केरल में एक सीट जीतकर सबका ध्यान खींचा है। यह जीत ऐसे समय में आई है, जब राज्य में कांग्रेस गठबंधन की लहर मानी जा रही थी।
केरल की कुथुपरम्बा विधानसभा क्षेत्र से RJD उम्मीदवार पी.के. प्रवीण ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस गठबंधन के तहत इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की उम्मीदवार जयंती राजन को हराया। यह मुकाबला काफी दिलचस्प रहा, क्योंकि एक ओर जहां राज्य में UDF का दबदबा दिख रहा था, वहीं दूसरी ओर वामपंथी खेमे के साथ चुनाव लड़ते हुए RJD ने यह सीट अपने नाम कर ली।
अगर पी.के. प्रवीण की प्रोफाइल पर नजर डालें तो वे पेशे से एक व्यवसायी हैं। उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से एमए और एम.फिल की डिग्री हासिल की है। उनके द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 3.3 करोड़ रुपये है, जिसमें 1.33 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 2.05 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर करीब 15.8 लाख रुपये की देनदारी है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनकी वार्षिक आय लगभग 15.9 लाख रुपये बताई गई है।
यह पहली बार नहीं है जब RJD ने केरल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई हो। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने इसी सीट पर जीत हासिल की थी, जब उसके उम्मीदवार के.पी. मोहन को लगभग 70 हजार वोट मिले थे। इस बार RJD ने कुल तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से एक सीट पर उसे सफलता मिली। चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव भी केरल पहुंचे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, केरल के चुनाव परिणामों ने जहां कांग्रेस की वापसी और वामपंथी राजनीति के कमजोर पड़ने का संकेत दिया है, वहीं RJD की यह अप्रत्याशित जीत भारतीय राजनीति में छोटे लेकिन अहम बदलावों की ओर इशारा करती है।
