पेरेंट्स ही होते हैं बच्चों के मेंटर

सोमा राजहंस

नई दिल्ली: यह क्यों भूल जाते हैं कि आप बडे हैं. और चिंटू छोटा. चिंटू से सभ्य व्यवहार की उम्मीद रखना पूरी तरह ठीक नहीं है. अगर रखते हैं, तो मेहनत आपको करनी होगी. सिर्फ गाल पुचकारने से बात नहीं बनेगी. गुड मैनर्स के बीज आपको चिंटू में छुटपन से ही बोने पड़ेंगे. तभी उससे कुछ उम्मीद रखिए वो बड़ा होने पर आपको बच्चे की तरह पालेगा. सबसे पहले बता दें कि चिंटू के शहर के नामचीन स्कूल में पढ़ने से आपकी डयूटी खत्म नहीं होती. उसे बच्चे अक्सर बड़ों की देखा देखी करते हैं. यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चा गुडमैनर्स और एटीकेट्स में दूसरे से पेश आए, तो स्वयं को नियंत्रित व संतुलित रखना होगा. आखिर चिंटू आप ही से सब कुछ सीखता है. हर बच्चे की पहली पाठशाला घर ही होती है.

बहुत कुछ सिखाने से आता है. सब कुछ सिखाना सिर्फ स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है. माना कि घर से बाहर आपको बच्चा परेशान करता है, लेकिन यहां आपको धैर्य से काम लेना होगा. जहां पब्लिक डीलिंग अधिक होती हो जैसे शॉपिंग, बैंक, पोस्ट ऑफिस, बिलिंग ऑफिस आदि यहां बच्चे को जरूर लेकर जाए. पब्लिक डीलिंग वाली जगह से वह बहुत कुछ स्वत ही सीख जाएग. मसलन दुनियादारी, पेपरवर्क, सोशल ऐटीकेटस, सेल्फ कॉन्फिडेंस आदि.

बच्चों से छोटा-मोटा घरेलू काम करवाएं. सबसे पहले बता दें कि 14 साल के कम उम्र के बच्चों का काम करवाना गलत है. लेकिन छोटे मोटे घरेलू काम काज से आपका लाडला एक्टिव यानी चुस्त-दुरुस्त रहेगा. साथ ही उसका मोरल बूस्ट और आपकी हेल्प भी होगी. यह कामकाज भारी भरकम नहीं हैं. काम है आपके पार्क की देखभाल, आपके नाते-रिश्तेदारों से फोन पर बातें करना, जब आप बिजी हों पास के जनरल स्टोर या सुपरमार्केट से ग्रोसरी लाना, अपने सिब्लिंग्स को स्कूल बस स्टॉप से लाना व छोड़ना, पुरानी अखबारें स्क्रैप बासकेट में रखना आदि.

अपनी हेल्प करवाने के साथ-साथ आप उनकी हेल्प भी करें. हेल्प कराने से वो आत्म निर्भर बनेगा, जो उसका आत्मविश्वास को बल देगा. इससे उसे अहसास होगा कि छोटे-मोटे काम बिना किसी के मदद के कर सकता है. मसलन-स्कूल के लिए स्वयं तैयार होना, जूते पॉलिश करना, अपने किताबों-कॉपियों पर कवर चढ़ाना, स्कूल  जाने से पूर्व व आने के बाद अपनी ड्रेस, बुक्स, बैग को उचित स्थान पर रखना, अपने कमरे, टेबल को साफ-सुथरा रखना आदि. यही नहीं यह इन गुड हैबिट से जीवन में अनुशासन से जीना सीखेगा.

प्लीज और थैंक्यू शब्द का इस्तेमाल किया करें. मालूम है आपको पर आप इसका प्रयोग नहीं करते. आज से आप इसे अपनाए. घर और बाहर. आपसे बच्चा भी सीखेगा. उसे बताएं कि तुम्हे कोई कुछ दे, तुम मम्मा से परमिशन मांगो या रिक्वेस्ट करनी हो तो थैंक्यू और प्लीज शब्द का प्रयोग करो.

डाइनिंग के तौर तरीकों को बताएं, कहीं भी खाना खाओ तो मुंह बंद करके खाओ, बिना आवाज निकाले खाओ खाना खाते समय बात नहीं करते, कुहनियां टेबल पर नहीं रखो और खाने से पहले नैपकिन थाई और फ्रंट साइड रखो. बच्चे को सिखाएं कि जोर-जोर से चिल्लाना ठीक नहीं होता है. धैर्य व सयंम से वह गुस्से पर काबू पा सकेगा. उसे सिखाइए कि हमेशा टोन धीमी करके बात करनी चाहिए.

याद रहे आप जैसा सामने करेंगें वह उसे तुरंत कॉपी करेगा. बच्चा आपसे ही सीखता है. इस बात का ध्यान रखते हुए उसके सामने किसी से गाली-गलौज नहीं करें. खास ध्यान दें कि भाषा सयंमित रहे. बच्चे को रिस्पेक्ट दें. इससे वो आपके करीब आएगा.आपकी सिखाई हर बात को अपनाएगा. उसे अकेले या सबके सामने डांटे या मारे-पीटे या गाली-गलौज नहीं करें. आपके ऐसा करने से असहज हो जाएगा, जो उसे आक्रामक, उद्दंड व जिद्दी बना देगा.

आपको बच्चों का पीछा करने को नहीं कह रहें, लेकिन जहां तक संभव हो ध्यान दें कि परिचितों व अपरिचितों से वह कैसे बात करता है.जहां आपको गलत लगे तुरंत टोकें. बच्चों को प्यार से समझाएं कि दोस्तों से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते. छुटपन की यह लड़ाई बड़े होने पर दुश्मनी बन सकती है. बच्चे को बताएं कि सबसे प्यार से बात करनी चाहिए. किसी से कोई मतलब नहीं निकालना. अन्य बच्चों के साथ उसका कैम्पैरिजन नहीं करें. यह तुलना उसे आक्रामक, उद्दंड व जिद्दी बना सकती है.

बच्चे में अच्छे वैल्यूज डालना आपकी जिम्मेदारी है. घर-बाहर सभी बड़े-बुजुर्गों की इज्जत करनी चाहिए. लेकिन यह सिर्फ सिखाने का काम नहीं है. इसके लिए आपको भी स्वयं को सिखाना होगा और बड़े-बुजुर्गों की इज्जत करनी होगी. याद रहे बच्चे कॉपी कैट होते हैं, जो देखते हैं वैसा  ही करते हैं.

आप जानते होंगे कि आज उत्पीड़न का शिकार सब से ज्यादा बच्चे हैं. इससे बच्चों को बचाने के लिए आपको बच्चों को समझाना होगा टच का मतलब. साथ ही उन्हें अच्छी मैनर्स भी सिखाएं, जैसे-किसी के सामने नाक में उंगली नहीं डालते, प्राइवेट पार्ट को नहीं छूते, कपड़े उठाकर खुजली नहीं करते, दांत नहीं किट-किटाते, नाक कपड़ों से साफ नहीं करते, गीले हाथों को पहनी डेस से नहीं सुखाते आदि.

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