‘बार-बार बाहर बैठाने से टूट सकता है कुलदीप का आत्मविश्वास’, अश्विन ने टीम मैनेजमेंट पर उठाए सवाल

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लगातार कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना उनके आत्मविश्वास और लय पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे में भी कुलदीप को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। यह फैसला तब और चौंकाने वाला रहा, जब भारत के दो अहम गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह (घुटने की चोट) और वॉशिंगटन सुंदर (हैमस्ट्रिंग) उपलब्ध नहीं थे।
भारतीय टीम ने चार विशेषज्ञ तेज़ गेंदबाज़ों और इकलौते स्पिनर के रूप में अक्षर पटेल को उतारा। इस संयोजन के चलते टीम के पास छठा गेंदबाज़ भी नहीं था, जबकि बल्लेबाज़ी पहले से ही नंबर-8 तक मौजूद थी। अश्विन बोले- आखिर कुलदीप को और क्या साबित करना है? टीम चयन पर प्रतिक्रिया देते हुए अश्विन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने लिखा,
“कुलदीप को न खिलाने के पीछे अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि इससे बल्लेबाज़ी सिर्फ नंबर-7 तक रह जाती है। लेकिन आज जब अर्शदीप सिंह नंबर-8 पर बल्लेबाज़ी कर रहे हैं, तब यह तर्क कितना सही लगता है? ऊपर से बुमराह भी टीम में नहीं हैं। ऐसे में कुलदीप के लिए बुरा महसूस होता है। लगातार बाहर बैठाने से किसी भी गेंदबाज़ की लय और आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।”
लगातार नहीं मिल रहा मौका
इंग्लैंड दौरे पर कुलदीप को पहले टी20 सीरीज में आराम दिया गया और उसके बाद तीनों वनडे मुकाबलों में भी प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया। हालांकि, उन्हें टीम में शामिल किया गया था, लेकिन एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।
यह सिलसिला सिर्फ इंग्लैंड दौरे तक सीमित नहीं है। इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में भी कुलदीप सिर्फ एक मुकाबला खेल पाए थे। लखनऊ में खेले गए उस मैच में उन्होंने 42 रन दिए थे, लेकिन कोई विकेट हासिल नहीं कर सके।
बैटिंग की गहराई बनी सबसे बड़ी वजह
भारतीय टीम मैनेजमेंट पिछले कुछ समय से व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे स्पिन ऑलराउंडरों को प्राथमिकता दे रहा है। दोनों खिलाड़ी बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने में सक्षम हैं, जिससे टीम की बल्लेबाज़ी मजबूत होती है।
दूसरी ओर, कुलदीप यादव एक विशेषज्ञ विकेट लेने वाले स्पिनर हैं, लेकिन सीमित बल्लेबाज़ी क्षमता के कारण उन्हें अक्सर प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना पड़ रहा है। यही वजह है कि टीम संतुलन के नाम पर भारत अपने सबसे प्रभावी रिस्ट स्पिनर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।
आईपीएल में भी रहा कठिन दौर
कुलदीप के लिए पिछले कुछ महीने आसान नहीं रहे हैं। आईपीएल 2026 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हुए वह लगातार प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे। इसके बाद ट्रेड विंडो में उन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने अपने साथ जोड़ लिया, जबकि ऋषभ पंत दिल्ली कैपिटल्स में लौट गए।
हालिया संघर्षों के बावजूद कुलदीप यादव का वनडे रिकॉर्ड उनकी काबिलियत की गवाही देता है। 31 वर्षीय लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिनर ने 121 वनडे मैचों में 194 विकेट अपने नाम किए हैं और वह भारत के सबसे सफल सीमित ओवरों के स्पिन गेंदबाज़ों में शामिल हैं।
ऐसे में लगातार उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा जाना क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस का विषय बन गया है। सवाल यही है कि क्या भारत टीम संतुलन और बल्लेबाज़ी की गहराई के लिए अपने सबसे बड़े विकेट-टेकर स्पिनर को लगातार नज़रअंदाज़ कर रहा है?
