असुर: अच्छाई और बुराई के बीच झूलती एक कहानी

आकांक्षा सिंह

नई दिल्ली:  अंत ही आरंभ है। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसा होता है जब प्रतीत होता है कि हर अच्छे बुरे पात्र का अंत हो चुका है पर कई बार वह अंत ही एक नई शुरुआत बन कर वापस आता है।

वूट सेलेक्ट पर  रिलीज हुई सीरीज ‘असुर’ इन दिनों काफी सुर्खियों में है। इस फ़िल्म में अरशद वारसी, वरुण सोबती, अनुप्रिया गोइंका, शारीब हाशमी मुख्य भूमिका निभाते हुए नज़र आ रहे है। इसके निर्देशक  ओनी सेन है जिन्होंने  साइंस और हिन्दू माइथोलॉजी को मिलाकर बड़ी ही खूबसूरती से फ़िल्म को दिखाया है।

यह एक ऐसी वेब सीरीज है जो आपको डराती भी है और साथ ही साथ खुद के अच्छे बुरे कर्म पर विचार करने को मजबूर भी कर देती है। इस सीरीज का पूरा नाम है “असुर- वेलकम टू योर डार्क साइड” अर्थात यह बात इसमें साफ-साफ दर्शाया गया है कि मनुष्य के अंदर छुपा हुआ डार्क साइड उसे खुद को भयभीत  कर देता है। शैतान और भगवान दोनों ही इंसान के अंदर छुपे होते है बस उन्हें ख़बर नहीं होती। यह सीरीज सस्पेंस थ्रिलर क्राइम सीरीज है जिसमें लॉजिक भी साथ ही साथ है। इस फ़िल्म के अंत तक आपको इस बात का एहसास बार-बार होता रहेगा की आम जीवन में भी यह होना पूरी तरह संभव है।

इस फ़िल्म में किसी भी पात्र को व्यर्थ में नहीं दिखाया गया है। हिन्दू धर्म के हिसाब के ‘असुर’ के अस्तित्व की कहानी को पूरे तरीके से बयान करने की कोशिश की गई है। इस कहानी  के माध्यम से साइंस और धर्म के बीच के संबंध को भी दिखाया है जिसे अक्सर समाज नकार देता है। इस कहानी में एक  तरफ विज्ञान पर फोकस जाता है तो दूसरी तरफ धर्म पर, सही और ग़लत के बीच मे उलझ जाता है इंसान पर अंत होते होते इस बात का एहसास होता है कि असल में  सही और ग़लत कुछ होता ही नहीं है हम अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से सही और ग़लत को महत्व दे देते है।

यह कहानी फॉरेंसिक एक्सपर्ट, सीबीआई ऑफिसर और एक ऐसे व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है जिसका बौद्धिक स्तर एक आम इंसान से काफी ज़्यादा होता है लेकिन अपने  पिता द्वारा असुर कहलाने के बाद वह खुद को असुर मान बैठता है और बचपन मे ही अपने पिता की हत्या कर देता है।  इस कहानी में एक बच्चा जो खुद को असुर मानता है और कैसे एक सीरियल किलर बना लेता है, उसका फॉरेंसिक एक्सपर्ट और सीबीआई से क्या रिश्ता है इन सभी सवालों का जवाब आपको यह सीरीज देखने के बाद में ही मिलेगा। सही और ग़लत, न्याय अन्याय के बीच  छिड़ी जंग में हर व्यक्ति कहीं न कहीं कुछ सवालों के जवाब ढूंढता है। इस कहानी को देखने के बाद आपके कई सवालों के जवाब खुद   ही आपके सामने खड़े हो जाएंगे।

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