सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने पीएम आवास पर कांग्रेस के प्रदर्शन को बताया ‘दिखावटी’

Sonam Wangchuk's wife, Gitanjali Angmo, termed the Congress protest at the PM's residence as 'performative'.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर कांग्रेस द्वारा किए गए हालिया विरोध प्रदर्शन की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इस प्रदर्शन को “दिखावटी” करार देते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों के चल रहे आंदोलन का अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।

इंडिया टुडे से बातचीत में आंग्मो ने कहा कि कांग्रेस नेताओं, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हैं, को प्रधानमंत्री आवास के बाहर अलग से प्रदर्शन करने के बजाय जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए था।

उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब सोनम वांगचुक को पिछले सप्ताह जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन वे वहीं से अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का 26वां दिन था।

‘जनता दिखावे और राजनीति को समझती है’

गीतांजलि आंग्मो ने 21 जुलाई को कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें ईमानदारी की कमी साफ दिखाई देती है। उनका आरोप था कि कुछ नेता वांगचुक के आंदोलन और उनकी विश्वसनीयता का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के घर के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में ईमानदारी नहीं थी। जनता को अब बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। यह जागरूक भारत है। जो लोग ईमानदार नहीं होंगे, उन्हें युवा खुद ही नकार देंगे।”

आंग्मो ने कहा कि केवल प्रतीकात्मक विरोध या दिखावटी कदम अब लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते। उनका मानना है कि जनता अब नेताओं की नीयत और उनके वास्तविक उद्देश्य को अच्छी तरह समझती है।

आंग्मो की यह टिप्पणी उस विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद आई, जिसमें राहुल गांधी और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के पास धरना दिया था। यह प्रदर्शन संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था।

इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया और उन्हें मौके से हटाया गया। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में उनकी नाक से खून निकलने की भी खबर सामने आई।

‘यह राजनीतिक आंदोलन नहीं’

आंग्मो ने स्पष्ट किया कि छात्रों का यह आंदोलन पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को यह संदेश दिया है कि अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें अपने वादों पर अमल भी करना होगा।

उन्होंने कहा, “इस आंदोलन ने हर राजनीतिक नेता को दिखा दिया है कि उन्हें अपनी कही बातों पर अमल करना होगा। अब वे लोगों को गुमराह नहीं कर सकते और न ही बेईमानी कर सकते हैं।”

‘संसद सर्वोच्च संस्था’

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की शेवनिंग स्कॉलर गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि यह आंदोलन न सरकार के पक्ष में है और न ही विपक्ष के। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद का ध्यान आकर्षित करना है।

उन्होंने कहा, “हमारे लिए न कोई सरकार है और न ही कोई विपक्ष। हमारे लिए संसद ही सर्वोच्च संस्था है। हम चाहते हैं कि संसद शिक्षा को एक बुनियादी और गंभीर मुद्दे के रूप में देखे।”

आंग्मो ने दोहराया कि जो भी व्यक्ति या संगठन बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के छात्रों के इस आंदोलन का समर्थन करना चाहता है, उसका स्वागत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक एजेंडे के साथ आने वालों के लिए इस आंदोलन में कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा, “जो भी अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ आएगा, वह पीछे छूट जाएगा, क्योंकि यह आंदोलन ईमानदारी और सच्चाई की नींव पर खड़ा है।”

गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों की भागीदारी देखी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *