‘इतनी बड़ी गलती’: वैभव सूर्यवंशी को ड्रॉप करने पर गौतम गंभीर पर भड़के कृष्णमाचारी श्रीकांत

'Such a huge mistake': Krishnamachari Srikkanth lashes out at Gautam Gambhir for dropping Vaibhav Sooryavanshi.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर, 1983 विश्व कप विजेता और पूर्व बीसीसीआई चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ के दौरान टीम से बाहर किए जाने पर भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कड़ी आलोचना की है। श्रीकांत का कहना है कि सिर्फ तीन मैचों में असफल रहने के बाद 15 वर्षीय खिलाड़ी को बाहर करना गलत फैसला था, जिससे उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता था।

श्रीकांत की यह प्रतिक्रिया तब आई, जब गुरुवार को ज़िम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने विस्फोटक बल्लेबाज़ी करते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। उन्होंने महज़ 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बना दिया।

इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ अपने शुरुआती तीन टी20 मुकाबलों में सूर्यवंशी 14, 13 और 15 रन ही बना सके थे। लगातार तीन पारियों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के कारण उन्हें सीरीज़ के पांचवें और अंतिम मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था।

अपने यूट्यूब चैनल पर श्रीकांत ने कहा, “वैभव के पास शॉट्स की शानदार रेंज है। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पारी में एक भी बेवजह क्रॉस-बैट शॉट नहीं खेला। यह लड़का वास्तव में बेहद खास है। लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा कि गौतम गंभीर ने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी। सिर्फ तीन मैचों में नाकाम रहने के बाद उसे टीम से बाहर कर दिया, जिससे उसके आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता था।”

गौरतलब है कि ज़िम्बाब्वे दौरे पर गौतम गंभीर टीम के साथ नहीं हैं और उनकी गैर-मौजूदगी में भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ वीवीएस लक्ष्मण टीम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

श्रीकांत ने सूर्यवंशी के समर्पण और मेहनत की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड सीरीज़ खत्म होने के बाद युवा बल्लेबाज़ छुट्टियां मनाने घर नहीं गया, बल्कि सीधे राजस्थान रॉयल्स के ट्रेनिंग कैंप पहुंच गया, जहां उसने अपनी बल्लेबाज़ी, खासकर शॉर्ट गेंदों के खिलाफ तकनीक पर लगातार काम किया।

उन्होंने कहा, “मैं वैभव के समर्पण को सलाम करता हूं। इंग्लैंड सीरीज़ के बाद वह घर नहीं गया, बल्कि सीधे राजस्थान रॉयल्स के कैंप में पहुंच गया। उसने अपनी कमजोरियों पर कड़ी मेहनत की क्योंकि वह पूरी दुनिया को दिखाना चाहता था कि वह एक असाधारण खिलाड़ी है।”

श्रीकांत ने यह भी कहा कि लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद सूर्यवंशी ने अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज़ से समझौता नहीं किया। उनके मुताबिक, अधिकांश युवा खिलाड़ी ऐसी स्थिति में टीम में अपनी जगह बचाने के लिए रक्षात्मक बल्लेबाज़ी करने लगते हैं, लेकिन वैभव ने निडर होकर अपना स्वाभाविक खेल जारी रखा।

उन्होंने कहा, “250 के स्ट्राइक रेट से रन बनाना कोई आसान काम नहीं है। आमतौर पर तीन बार फेल होने के बाद खिलाड़ी सिंगल-डबल लेकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वैभव ने परिणाम की चिंता किए बिना वही आक्रामक क्रिकेट खेली, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। 18 गेंदों में अर्धशतक बनाना उनके लिए जैसे आम बात हो गई है। यही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *