वसुधैव कुटुम्बकम् के साथ ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ की स्थापना ही संघ का लक्ष्य
डॉ धनंजय गिरि भारतीय चिंतन की मूल धारा सदैव समावेशी, सार्वभौमिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही है। “वसुधैव कुटुम्बकम्”
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