तृणमूल कांग्रेस पर दावे की जंग चुनाव आयोग तक पहुँची, दोनों गुटों ने पेश किए अपने-अपने दावे
चिरौरी न्यूज
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संघर्ष अब चुनाव आयोग तक पहुँच गया है। पार्टी पर नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपने-अपने दावे पेश किए हैं।
एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग को अपनी पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (नेशनल वर्किंग कमेटी) की जानकारी सौंपी, वहीं दूसरी ओर रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में अपनी दावेदारी प्रस्तुत की।
मंगलवार शाम बागी गुट के पाँच तृणमूल विधायक—अरूप राय, रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान, अखरुज्जमान और संदीपन साहा—ने कोलकाता के स्ट्रैंड रोड स्थित निर्वाचन कार्यालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नीलम मीना से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि वही “वास्तविक” तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, बागी नेताओं ने राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के पदाधिकारियों सहित 30 सदस्यों की सूची और सोमवार को आयोजित बैठक का पूरा विवरण निर्वाचन अधिकारियों को सौंपा। बताया जा रहा है कि ये सभी दस्तावेज पहले ही नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में जमा कराए जा चुके हैं।
बैठक के बाद रिताब्रता बनर्जी ने कहा, “हमने राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की जानकारी और सदस्यों के नाम चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं। हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। हम चुनाव चिह्न क्यों मांगेंगे? हम ही तृणमूल हैं।”
विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस लगातार राजनीतिक झटकों का सामना कर रही है। इसी क्रम में रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ममता बनर्जी को ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न वाली पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया है। साथ ही, अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी उनके पद से हटाए जाने की घोषणा की गई है।
हालाँकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बागी गुट पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर दावा करने में सफल होगा या नहीं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, रिताब्रता गुट के पास राज्य स्तर की पार्टी समितियों के पुनर्गठन के लिए 21 दिनों का समय है। इसके बाद वह चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक रूप से “असली तृणमूल कांग्रेस” के रूप में मान्यता प्राप्त करने का दावा पेश कर सकता है। उधर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) गुट ने भी अपनी राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का पुनर्गठन कर उसकी सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है। इस सूची में ममता बनर्जी को पार्टी की अध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय को नई कार्यकारी समिति की सूची भेजी। राजनीतिक विश्लेषक इस कदम को पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ के संकेत के रूप में देख रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन ममता बनर्जी ने अपनी नई कार्यकारी समिति की सूची चुनाव आयोग को सौंपी, उसी दिन रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में अपनी अलग कार्यकारी समिति का गठन किया।
ममता बनर्जी द्वारा नई समिति के गठन पर प्रतिक्रिया देते हुए रिताब्रता बनर्जी ने कहा, “अगर आने वाले कुछ दिनों में उनकी समिति के दो सदस्य भी हमारे साथ आ जाएँ तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।” हालांकि उन्होंने उन नेताओं के नाम उजागर नहीं किए जिनके बागी खेमे में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बागी विधायकों की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इन नेताओं के चुनावी नामांकन पत्रों पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर थे। वे उन्हीं के नाम और नेतृत्व के आधार पर चुनाव जीतकर आए हैं। अब वही लोग खुद को ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। जनता सब कुछ देख रही है।”
गौरतलब है कि सोमवार को बागी विधायकों ने कोलकाता के एक होटल में बैठक कर पार्टी की नई समितियों को अंतिम रूप दिया था। इस नई संरचना में न तो संस्थापक-अध्यक्ष ममता बनर्जी को कोई स्थान दिया गया और न ही अभिषेक बनर्जी को। इसके बजाय रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान, बिप्लब मित्रा और संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त किया गया।
