अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाले विधेयक को दी मंजूरी, भारत पर 100% टैरिफ का प्रावधान
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कर दिया गया है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में भेजा जाएगा, जो 31 अगस्त को दोबारा बैठक करेगी।
विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जाएगा, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव डालना और यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसके वित्तीय संसाधनों को सीमित करना है।
वर्तमान में चीन, भारत, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित रूसी नेताओं और अधिकारियों, ओलिगार्क्स तथा वित्तीय संस्थानों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है।
ईरान पर भी बढ़ेगा प्रतिबंधों का दायरा
विधेयक में केवल रूस को निशाना नहीं बनाया गया है। इसके तहत ‘ईरान सैंक्शंस एक्ट ऑफ 1996’ की अवधि को बढ़ाकर 2031 तक करने का प्रावधान भी शामिल है। यह कानून उन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है, जो ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करती हैं।
इस विधेयक को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर आगे बढ़ाया था। 11 जुलाई को कीव की यात्रा के बाद ग्राहम की अचानक मृत्यु हो गई। इसके बाद दोनों पार्टियों के नेताओं ने इस विधेयक को आगे बढ़ाने और यूक्रेन के समर्थन में ग्राहम की भूमिका तथा उनकी विरासत को सम्मान देने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए।
ग्राहम की मृत्यु के बाद उनकी सीट पर नियुक्त की गई उनकी बहन डार्लिन ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक उन प्रमुख देशों के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखता है, जो रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं—या तो अमेरिका के साथ व्यापार करें या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखें।
वोट के बाद ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा कि ग्राहम को इस कदम पर गर्व होता। उन्होंने कहा कि ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन लोगों को रोकने के लिए हैं, जो यूक्रेन के लोगों के खिलाफ जारी “जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक युद्ध” में रूस का साथ दे रहे हैं।
टैरिफ अधिकार बढ़ाने पर चिंता
हालांकि, सभी डेमोक्रेट सांसद इस विधेयक के समर्थन में नहीं हैं। कुछ ने चेतावनी दी है कि कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के व्यापक नए अधिकार दे सकता है। उनका कहना है कि ट्रंप पहले ही अपनी व्यापार नीति में टैरिफ को प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर चुके हैं।
डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने संयुक्त बयान में कहा कि वे यूक्रेन का समर्थन करने और रूस को उसके युद्ध के लिए जवाबदेह ठहराने की कोशिशों का समर्थन करते हैं, लेकिन मौजूदा विधेयक इन लक्ष्यों को हासिल करने में प्रभावी नहीं होगा।
दोनों सांसदों के मुताबिक, यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ से जुड़े ऐसे व्यापक अधिकार देगा, जिनका मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इन अधिकारों का इस्तेमाल रूस पर दबाव बनाने के बजाय ट्रंप की व्यापक व्यापार नीति और नए टैरिफ लगाने के लिए किया जा सकता है, जिसका आर्थिक बोझ अंततः अमेरिकी नागरिकों पर पड़ सकता है।
अब इस विधेयक की अगली परीक्षा प्रतिनिधि सभा में होगी। यदि हाउस भी इसे मंजूरी दे देता है, तो यह राष्ट्रपति ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। इसके बाद रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी व्यापार और आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है।
