कालजयी पथ का अनवरत यात्री: श्री नरेन्द्र मोदी
डॉ. धनंजय गिरि
राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
कुछ व्यक्तित्व समय के साथ नहीं चलते, बल्कि समय की दिशा बदल देते हैं। वे केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि इतिहास की नई गाथा लिखते हैं। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने संघर्ष को साधना, सेवा को धर्म और राष्ट्र को सर्वोच्च मानकर अपने जीवन को जनकल्याण के लिए समर्पित किया। आज वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के विश्वास, आत्मबल और आत्मगौरव के प्रतीक बन चुके हैं।
भारतीय संस्कृति में सम्मान का अर्थ केवल पद या प्रतिष्ठा प्राप्त करना नहीं है। सम्मान वह अवस्था है, जहां व्यक्ति अपने अहंकार से ऊपर उठकर समाज के लिए वंदनीय बन जाता है। अंजनीपुत्र और पवनपुत्र तभी हनुमान बने, जब उन्होंने स्वयं को प्रभुकार्य के लिए पूर्णतः समर्पित कर दिया। यही भारतीय परंपरा का आदर्श है। श्री नरेन्द्र मोदी का जीवन भी इसी आदर्श की आधुनिक अभिव्यक्ति प्रतीत होता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों और भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक अनुशासन में तपकर निकले श्री नरेन्द्र मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प माना। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियां, “हार में न जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं”, मानो उनके जीवन का भी सूत्र बन गईं। चुनौतियां आईं, आलोचनाएं हुईं, लेकिन उनका पथ कभी रुका नहीं।
महाकवि आरसी प्रसाद सिंह ने लिखा था, “जीवन क्या है, निर्झर है, मस्ती ही इसका पानी है।” श्री नरेन्द्र मोदी का जीवन भी इसी अविरल निर्झर की भांति निरंतर बहता रहा। अभावों में जन्म, संघर्षों में बचपन, कठिन परिस्थितियों में व्यक्तित्व का निर्माण और फिर राष्ट्र नेतृत्व तक की यात्रा, यह किसी साधारण मनुष्य की कहानी नहीं, बल्कि संकल्प, श्रम और आत्मविश्वास की अद्भुत गाथा है।
प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज की वे पंक्तियां उनके जीवन की तपस्या को मानो शब्द देती हैं, “पांव जब तलक उठे, जिंदगी फिसल गई, पात-पात झर गए, शाख-शाख जल गए…” लेकिन नीरज की ही अगली पंक्तियां श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन का ध्येय बन गईं, “दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूं, और सांस यूं कि स्वर्ग धरा पर उतार दूं।” यही कारण है कि उन्होंने शासन को केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनजीवन में परिवर्तन का माध्यम बनाया।
बचपन में अपनी माता को चूल्हे के धुएं में संघर्ष करते देखी गई पीड़ा उनके अंतर्मन में गहराई तक अंकित हो गई थी। यही अनुभव आगे चलकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के रूप में सामने आया, जिसने करोड़ों गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाई। यह केवल गैस कनेक्शन देने की योजना नहीं थी, बल्कि करोड़ों माताओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा का अभियान था।
महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी पीड़ादायक सामाजिक व्यवस्था से मुक्ति दिलाने का साहसिक निर्णय लिया। यह कदम केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि समान अधिकार और महिला गरिमा की दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन था। आज शिक्षा, विज्ञान, सेना, अंतरिक्ष, खेल और प्रशासन, हर क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के बदलते स्वरूप की गवाही देती है।
श्री नरेन्द्र मोदी ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहूंचाने को अपना लक्ष्य बनाया। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाया, जबकि जल जीवन मिशन ने लाखों घरों तक नल से जल पहुंचाने का कार्य किया। प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों परिवारों को पक्के घर का सपना साकार किया। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत अभियान और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने भारत की अर्थव्यवस्था और नवाचार को नई ऊर्जा प्रदान की।
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व में भारत ने नई दृढ़ता का परिचय दिया। आतंकवाद के विरुद्ध कठोर नीति, सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्माण तथा सैनिकों के मनोबल को नई ऊंचाई देना उनके नेतृत्व की विशेष पहचान रही है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाने का निर्णय भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकीकरण की दृष्टि से ऐतिहासिक माना गया। वहीं अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण भी भारतीय सांस्कृतिक चेतना के एक लंबे अध्याय का महत्वपूर्ण पड़ाव बना।
भारत ने विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कीं। चंद्रयान की सफलता, आदित्य अभियान, गगनयान की तैयारी तथा डिजिटल तकनीक के विस्तार ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाज़ार नहीं, बल्कि नवाचार, प्रौद्योगिकी और नेतृत्व की उभरती शक्ति के रूप में देख रहा है।
विदेश नीति के क्षेत्र में श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहूंचाया। उन्होंने विश्व के अनेक देशों के साथ भारत के संबंधों को नई मजबूती प्रदान की। वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज़ पहले से अधिक प्रभावशाली हुई। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय सहयोग जैसे विषयों पर भारत की भूमिका निर्णायक बनकर उभरी। उनके नेतृत्व में भारत को वैश्विक दक्षिण की सशक्त आवाज़ के रूप में नई पहचान मिली।
विश्व समुदाय ने भी उनके योगदान को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। उन्हें सऊदी अरब का सर्वोच्च नागरिक सम्मान किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश, संयुक्त अरब अमीरात का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ ज़ायेद, रूस का ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल, फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान लीजन ऑफ ऑनर, मिस्र का ऑर्डर ऑफ द नाइल, पापुआ न्यू गिनी का कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू, फिजी का कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी, भूटान का ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो, ग्रीस का ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर, नाइजीरिया का ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर, डोमिनिका का डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर, कुवैत का ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर, मॉरीशस का ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन सहित अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। ये सम्मान केवल एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं।
आज श्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है। विश्व के अनेक देशों में रहने वाला भारतीय समुदाय उन्हें भारत के आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का प्रतिनिधि मानता है। उनका प्रत्येक विदेश दौरा भारतीय संस्कृति, लोकतंत्र और विकास मॉडल को विश्व के सामने नए आयामों के साथ प्रस्तुत करता है।
निस्संदेह, किसी भी लोकतंत्र में नेतृत्व का मूल्यांकन समय करता है। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, नीतियों पर बहस हो सकती है, किंतु यह निर्विवाद है कि श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की राजनीति, शासन व्यवस्था और वैश्विक पहचान पर गहरी छाप छोड़ी है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि साधारण परिस्थितियों से उठकर भी असाधारण उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं, यदि लक्ष्य राष्ट्रसेवा हो और संकल्प अडिग हो।
समय की धारा निरंतर बहती रहती है, पर कुछ यात्री ऐसे होते हैं जो स्वयं काल की गति के पर्याय बन जाते हैं। श्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा भी उसी कालजयी पथ की यात्रा है, जहां संघर्ष साधना बन जाता है, सेवा नेतृत्व बन जाती है और व्यक्ति एक जीवंत किंवदंती का स्वरूप ग्रहण कर लेता है। आने वाली पीढ़ियां इस यात्रा का मूल्यांकन अपने-अपने दृष्टिकोण से करेंगी, किंतु इतना निश्चित है कि इक्कीसवीं शताब्दी के भारत के इतिहास में श्री नरेन्द्र मोदी का अध्याय सदैव एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और व्यापक विमर्श का विषय बना रहेगा।
(डॉक्टर धनंजय गिरि, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता है)

