‘रामायण’ के मेकर्स की समझ पर भड़के दर्शक, ‘मंगल रंग’ में एआर रहमान के संगीत से लेकर राम जी की हल्दी रस्म तक पर उठे सवाल
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: रणबीर कपूर अभिनीत फिल्म ‘रामायण’ के नए गाने ‘मंगल रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। एआर रहमान के संगीत निर्देशन में तैयार इस गाने को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गाना भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रेम, पवित्र मिलन और उनके साथ के सफर को दर्शाने के उद्देश्य से पेश किया गया है। लेकिन रिलीज होते ही गाने के संगीत और एक दृश्य ने दर्शकों के बीच बहस छेड़ दी है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने फिल्म के निर्माताओं की रचनात्मक समझ और धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर तीखे सवाल उठाए हैं।
रामायण में कव्वाली जैसा संगीत क्यों?
गाने के सामने आते ही कुछ दर्शकों ने इसके कव्वाली और सूफियाना अंदाज वाले संगीत पर आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना है कि रामायण जैसे पवित्र महाकाव्य पर आधारित फिल्म में संगीत तैयार करते समय भारतीय परंपराओं, प्रसंगों और सांस्कृतिक संदर्भों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इतने विशाल और संवेदनशील विषय को केवल भव्यता और लोकप्रिय संगीत के सहारे पेश करना पर्याप्त नहीं है।
एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “वाल्मीकि रामायण में सूफी कव्वाली की धुनें डालना बॉलीवुड के भ्रम की पराकाष्ठा है। न सांस्कृतिक समझ, न शोध, बस बड़े बजट पर पुराने फॉर्मूले चिपका दिए गए हैं। पवित्र इतिहास को किसी आम रोमांटिक फिल्म की तरह पेश करना बंद कीजिए!”
इस टिप्पणी के जरिए यूजर ने सीधे तौर पर फिल्म के निर्माताओं की सोच पर सवाल उठाए। आलोचकों की नाराजगी का मूल सवाल यही है कि क्या रामायण जैसे महाकाव्य को प्रस्तुत करते समय संगीत की लोकप्रियता से ज्यादा उसके सांस्कृतिक संदर्भों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए?
राम जी की हल्दी रस्म में माता सीता की मौजूदगी पर सवाल
विवाद केवल संगीत तक सीमित नहीं रहा। गाने के एक दृश्य ने भी दर्शकों को नाराज कर दिया है। दृश्य में महिलाओं को भगवान श्रीराम को हल्दी लगाते हुए दिखाया गया है, जबकि माता सीता उनके पास खड़ी नजर आती हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि आखिर यह कौन-सा प्रसंग है और इसे किस परंपरा के आधार पर फिल्माया गया है?
एक यूजर ने सवाल उठाते हुए लिखा, “यह रामायण का ट्रेलर है, जिसमें सीता जी राम जी की हल्दी रस्म देख रही हैं। दुल्हन कब से दूल्हे की हल्दी की रस्म देखने लगी? क्या यह हिंदू परंपरा का अपमान नहीं है?”
हालांकि, कुछ अन्य दर्शकों का कहना है कि इस दृश्य को हल्दी की रस्म समझना गलत हो सकता है और यह भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़ा प्रसंग भी हो सकता है। यानी दृश्य की वास्तविक पृष्ठभूमि को लेकर भी सोशल मीडिया पर मतभेद हैं।
करोड़ों की फिल्म, लेकिन सांस्कृतिक बारीकियों का क्या?
रामायण केवल एक फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा महाकाव्य है। ऐसे में इसके किसी भी प्रसंग को पर्दे पर उतारते समय निर्माताओं से सामान्य फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक सावधानी और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
भव्य सेट, बड़े सितारे और नामी संगीतकार किसी फिल्म को चर्चा में जरूर ला सकते हैं, लेकिन धार्मिक महाकाव्य की प्रस्तुति में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसकी प्रामाणिकता और प्रसंगों की समझ का होता है। यदि किसी दृश्य या संगीत शैली को लेकर दर्शकों के मन में भ्रम पैदा हो रहा है, तो निर्माताओं को उसकी पृष्ठभूमि स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल ‘मंगल रंग’ को लेकर उठे सवालों ने फिल्म के मेकर्स के सामने एक अहम चुनौती खड़ी कर दी है। दर्शकों की नाराजगी इस बात की याद दिलाती है कि रामायण जैसे विषय पर रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ सांस्कृतिक संवेदनशीलता और तथ्यात्मक सावधानी भी उतनी ही जरूरी है। हालांकि, गाने और विवादित दृश्य को लेकर निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की पुष्टि यहां नहीं है।
