अधिकारियों की एक गलती ने तोड़ दिया हर्षिता का एशियन गेम्स का सपना! सजा भी खिलाड़ी को ही भुगतनी पड़ी

An official's blunder shattered Harshita's Asian Games dream! It was the athlete who had to bear the consequences.
(Pic credit: Instagram)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत में खेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ओडिशा के भुवनेश्वर में चल रही राष्ट्रीय अंतर-राज्य सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तमिलनाडु की युवा हर्डलर हर्षिता का एशियन गेम्स में जगह बनाने का सपना अधिकारियों की एक गंभीर गलती की वजह से टूट गया।

यह प्रतियोगिता आगामी एशियन गेम्स के लिए चयन ट्रायल भी है, लेकिन तकनीकी अधिकारियों की एक हैरान कर देने वाली चूक का खामियाजा खिलाड़ी को भुगतना पड़ा।

ट्रैक पर 10वीं हर्डल ही नहीं थी

महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स हीट-1 में हर्षिता लेन नंबर-8 में दौड़ रही थीं। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1 मिनट 1.03 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) समय निकाला और अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया।

लेकिन रेस के दौरान चौथी बाधा पार करने के बाद उन्हें एक बड़ा झटका लगा। उनकी लेन में पांचवीं बाधा (हर्डल) मौजूद ही नहीं थी। अचानक सामने बाधा न देखकर हर्षिता ने तत्काल फैसला लेते हुए बगल की लेन-7 में जाकर वहां की हर्डल पार की और फिर वापस अपनी लेन में लौटकर रेस पूरी की।

बाद में जांच में पता चला कि तकनीकी अधिकारियों ने लेन-8 में 10 की बजाय केवल 9 हर्डल ही लगाई थीं।

अधिकारियों की गलती, सजा खिलाड़ी को

इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी लेने के बजाय अधिकारियों ने हर्षिता का शानदार प्रदर्शन ही रद्द कर दिया। उनका पर्सनल बेस्ट समय अमान्य घोषित कर दिया गया।

इसके बाद उन्हें शनिवार सुबह अकेले टाइम ट्रायल दौड़ने का आदेश दिया गया। फाइनल में पहुंचने के लिए उन्हें बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के 1 मिनट 2 सेकंड से बेहतर समय निकालना था। ट्रैक एंड फील्ड में अकेले टाइम ट्रायल दौड़ना खिलाड़ियों के लिए बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा का माहौल और दूसरे खिलाड़ियों की गति नहीं मिल पाती।

48 घंटे में तीन रेस, आखिरकार टूट गया सपना

लगातार दो दिनों के भीतर तीन कठिन रेस दौड़ने का असर हर्षिता के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दिया। शनिवार सुबह हुए टाइम ट्रायल में वह 1 मिनट 2.54 सेकंड का समय ही निकाल सकीं, जो क्वालिफिकेशन मार्क से थोड़ा पीछे था।

इसके साथ ही वह फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं और एशियन गेम्स के लिए उनकी दावेदारी को बड़ा झटका लगा।  प्रतियोगिता से बाहर होने के बाद भावुक हर्षिता ने कहा, “अधिकारियों ने कहा कि गलती मेरी भी थी, क्योंकि मैंने रेस के दौरान दूसरी लेन की बाधा पार की थी।” यह बयान पूरे मामले पर कई सवाल खड़े करता है कि जब ट्रैक की व्यवस्था में ही तकनीकी खामी थी, तो उसकी सजा खिलाड़ी को क्यों दी गई।

पिछले साल जीता था गोल्ड

महज 18 साल की हर्षिता पिछले साल वारंगल में आयोजित इंडिया ओपन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर हर्डल्स का स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इस बार भी वह शानदार फॉर्म में थीं और एशियन गेम्स के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही थीं।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) और प्रतियोगिता के तकनीकी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैक की व्यवस्था में अधिकारियों की गलती थी, तो उसका नुकसान खिलाड़ी को नहीं उठाना चाहिए था।

हर्षिता का एशियन गेम्स खेलने का सपना उनकी गति या प्रदर्शन की कमी से नहीं, बल्कि आयोजन में हुई एक गंभीर तकनीकी लापरवाही की वजह से टूट गया।

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