भारतीय टेस्ट क्रिकेट के ‘संकटमोचक’ अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया, जिसने अपने शांत स्वभाव, शानदार तकनीक और विदेशी सरज़मीं पर यादगार पारियों के दम पर देश को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं।
करीब डेढ़ दशक तक भारतीय क्रिकेट का अहम हिस्सा रहे रहाणे ने टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। अपने करियर में उन्होंने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले और तीनों प्रारूपों को मिलाकर 8,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाए।
हालांकि उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मिली, जब उन्होंने चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए इतिहास रच दिया। एडिलेड टेस्ट में महज 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को सीरीज हारने का दावेदार मान लिया था। नियमित कप्तान विराट कोहली पहले टेस्ट के बाद स्वदेश लौट चुके थे और टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल होकर बाहर हो गए थे।
ऐसे कठिन दौर में अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर शानदार शतक जड़कर भारत को यादगार जीत दिलाई। उनकी कप्तानी में भारत ने चार मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2-1 से अपने नाम की। यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे महान टेस्ट सीरीज जीतों में गिनी जाती है और रहाणे के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
मुंबई की गलियों से भारतीय टीम तक का सफर
अजिंक्य रहाणे का जन्म 6 जून 1988 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ। बाद में उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उन्होंने बचपन से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने क्रिकेट के प्रति उनके जुनून को पूरा समर्थन दिया।
मुंबई के प्रसिद्ध क्रिकेट ढांचे में रहाणे ने अपनी प्रतिभा को निखारा। कम उम्र से ही उनकी तकनीकी बल्लेबाजी और लंबी पारियां खेलने की क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने भारतीय टीम का दरवाजा खटखटाया।
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
रहाणे ने रणजी ट्रॉफी में मुंबई के लिए कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं और घरेलू क्रिकेट में खुद को भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। उनकी निरंतरता का ही परिणाम था कि उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी उन्होंने मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजायंट, दिल्ली कैपिटल्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। राजस्थान रॉयल्स के लिए उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और टीम की कप्तानी भी की।
विदेशी सरज़मीं पर बने भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज
अजिंक्य रहाणे को हमेशा विदेशी परिस्थितियों का विशेषज्ञ बल्लेबाज माना गया। तेज़ और उछाल भरी पिचों पर उनकी तकनीक और धैर्य भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे।
उन्होंने लॉर्ड्स (इंग्लैंड), मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), वेलिंग्टन (न्यूजीलैंड), कोलंबो (श्रीलंका) और वेस्ट इंडीज जैसी कठिन परिस्थितियों में कई शतक लगाए। खासकर विदेशी दौरों पर उनके बल्ले से निकली पारियों ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
फिसलन भरी स्लिप में ‘सुरक्षित हाथ’
रहाणे सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन स्लिप फील्डिंग के लिए भी जाने जाते थे। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कई अविश्वसनीय कैच लपके और लंबे समय तक भारतीय टीम की स्लिप कॉर्डन की सबसे मजबूत कड़ी बने रहे।
उनकी चुस्ती, एकाग्रता और सुरक्षित हाथों ने भारतीय गेंदबाजों को कई अहम विकेट दिलाए।
शांत स्वभाव, लेकिन मजबूत नेतृत्व
अजिंक्य रहाणे की सबसे बड़ी पहचान उनका शांत और संतुलित व्यक्तित्व रहा। मैदान पर मुश्किल परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी अपना धैर्य नहीं खोया। यही कारण था कि साथी खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें एक स्वाभाविक नेता मानते थे।
ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत ने साबित कर दिया कि दबाव की घड़ी में रहाणे किस तरह टीम को प्रेरित कर सकते हैं। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने साहस, अनुशासन और सामूहिक प्रदर्शन का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।
आंकड़ों से कहीं बड़ा है रहाणे का योगदान
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में रहाणे ने तीनों प्रारूपों में मिलाकर 8,000 से अधिक रन बनाए। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कई यादगार शतक लगाए और भारत की कई ऐतिहासिक जीतों के नायक बने। हालांकि उनके करियर के अंतिम वर्षों में टीम में जगह बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने टीम के हित को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखा।
एक प्रेरणादायक विरासत छोड़ गए रहाणे
अजिंक्य रहाणे का करियर केवल रनों और रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को यह सिखाया कि शांत स्वभाव, अनुशासन, धैर्य और टीम के प्रति निस्वार्थ समर्पण भी महान खिलाड़ियों की पहचान होते हैं।
मेलबर्न की वह शतकीय पारी, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत, विदेशी पिचों पर संघर्षपूर्ण बल्लेबाजी और स्लिप में शानदार फील्डिंग हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास का हिस्सा रहेंगी।
रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसे खिलाड़ी को विदाई दी है, जिसने बिना शोर-शराबे के अपने प्रदर्शन से करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता और टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में अपनी जगह हमेशा के लिए दर्ज करा ली।
