कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बहाने कांग्रेस की लोक सभा चुनाव की तैयारी

Congress's Preparations for the Lok Sabha Elections Under the Guise of a Leadership Change in Karnatakaचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर आखिरकार शुक्रवार को विराम लग गया। पार्टी ने सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की निर्णायक भूमिका रही।

सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने सोमवार और मंगलवार को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से अलग-अलग बातचीत की। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी लगातार चर्चा में शामिल रहे।

इसके बाद राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच करीब 35 मिनट की अहम वन-टू-वन बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मनाया। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा कि उन्हें केवल कर्नाटक नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।

हालांकि सिद्धारमैया का तर्क था कि कांग्रेस की दोबारा सत्ता में वापसी उनके नेतृत्व में ही संभव है और डीके शिवकुमार को 2028 में मौका दिया जा सकता है। लेकिन राहुल गांधी अपने फैसले पर अड़े रहे।

केरल मॉडल से मिला संकेत

कांग्रेस के भीतर इस फैसले की तुलना हाल ही में केरल में मुख्यमंत्री चयन को लेकर हुए घटनाक्रम से की जा रही है। वहां विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद वी डी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे।

शुरुआत में राहुल गांधी केसी वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे, लेकिन बाद में जब यह स्पष्ट हुआ कि वी डी सतीशन को जनता और सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का ज्यादा समर्थन प्राप्त है, तब पार्टी ने अपना रुख बदल लिया।

सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक और केरल दोनों मामलों में प्रियंका गांधी वाड्रा की शांत लेकिन प्रभावी भूमिका भी देखने को मिली।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ से सबक

कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि पार्टी ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ की पिछली गलतियों से सीख ली है।

राजस्थान में 2022 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आ गया था। पार्टी नेतृत्व सचिन पायलट को आगे बढ़ाना चाहता था, लेकिन अशोक गहलोत ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया। लंबा विवाद अंततः कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हुआ और पार्टी 2023 का चुनाव हार गई।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव के बीच कथित ‘रोटेशनल मुख्यमंत्री’ समझौते को लेकर लगातार विवाद बना रहा। समय रहते समाधान नहीं निकल पाने का असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

कर्नाटक में बदली रणनीति

कर्नाटक में भी 2023 विधानसभा चुनाव के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझेदारी की चर्चा रही थी, हालांकि इसे कभी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया।

नवंबर 2025 में ढाई साल पूरे होने के बाद डीके शिवकुमार खेमे ने नेतृत्व परिवर्तन का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया था। लेकिन इस बार कांग्रेस आलाकमान ने देरी करने के बजाय फैसला लेने का रास्ता चुना।

सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी अब फैसले लेने में ज्यादा सक्रिय और व्यावहारिक हो गए हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुभव, केसी वेणुगोपाल के फीडबैक सिस्टम और प्रियंका गांधी वाड्रा व सोनिया गांधी की सलाह के आधार पर रणनीति बनाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि अब कांग्रेस का हर बड़ा राजनीतिक फैसला 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। तब तक देश में 16 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं और पार्टी किसी भी राज्य में आंतरिक कलह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

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