वैभव सूर्यवंशी पर जल्दबाज़ी न करें, चेतावनी दे रहे हैं डैरिल कलिनन

Daryll Cullinan warns against rushing Vaibhav Sooryavanshi
(Pic: BCCI)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज़ डैरिल कलिनन ने 15 वर्षीय भारतीय बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को लेकर भावुक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि खेल जगत पहले भी कई बाल प्रतिभाओं को बहुत जल्दी मिली शोहरत के कारण टूटते हुए देख चुका है और क्रिकेट को इस इतिहास से सबक लेना चाहिए।

कलिनन ने अपने स्तंभ में अमेरिकी टेनिस खिलाड़ियों जेनिफर कैप्रियाटी, एंड्रिया जेगर और ट्रेसी ऑस्टिन के उदाहरण दिए। उन्होंने लिखा कि जेनिफर कैप्रियाटी महज 13 वर्ष की उम्र में स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड के कवर पर थीं, 16 वर्ष की उम्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं, लेकिन 18 साल की उम्र तक उन्हें पुनर्वास केंद्र जाना पड़ा और उन्होंने आत्महत्या के विचार आने की बात भी स्वीकार की थी। वहीं एंड्रिया जेगर 16 वर्ष की उम्र में विश्व नंबर दो बनीं, लेकिन 21 वर्ष की उम्र में चोट के कारण संन्यास लेना पड़ा। ट्रेसी ऑस्टिन ने 16 वर्ष की उम्र में यूएस ओपन जीता, लेकिन जल्द ही उनका करियर ढलान पर पहुंच गया।

कलिनन ने लिखा कि ये केवल खेल इतिहास के किस्से नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनियां हैं। उनके अनुसार क्रिकेट भी अब इसी तरह की कहानी की शुरुआत में खड़ा दिखाई देता है और इसका केंद्र वैभव सूर्यवंशी हैं।

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप जीती। इसके बाद उन्होंने भारत ए की ओर से सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसके बाद उन्हें भारतीय सीनियर टी20 टीम में जगह मिली।

हालांकि आयरलैंड दौरे पर उन्हें पदार्पण का मौका नहीं मिला। टीम प्रबंधन ने कहा कि मौजूदा क्रम में बदलाव नहीं किया जाएगा और युवा खिलाड़ी को पहले अंतरराष्ट्रीय माहौल में ढलने का समय दिया जाएगा। इस फैसले पर क्रिकेट जगत दो हिस्सों में बंट गया।

पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि वैभव को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए, टीम संस्कृति को समझना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए। वहीं पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने उनका जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय पदार्पण कराने की वकालत की है।

डैरिल कलिनन का कहना है कि वैभव की प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है, लेकिन यही वजह है कि क्रिकेट को उनके मामले में जल्दबाज़ी से बचना चाहिए। उन्होंने लिखा कि वैभव को अभी अपने घर पर रहकर पढ़ाई करनी चाहिए, दोस्तों के साथ गली क्रिकेट खेलना चाहिए और सामान्य बचपन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वैभव ने इसी साल कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा छोड़कर आईपीएल खेलने का फैसला किया था।

कलिनन के अनुसार टी20 क्रिकेट युवा खिलाड़ियों की आक्रामक शैली को बढ़ावा देता है, लेकिन क्रिकेट खेलने के लिए तैयार होना और उससे जुड़े भारी दबावों के लिए मानसिक रूप से तैयार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

उन्होंने कहा कि वैभव आज दुनिया के सबसे बड़े और सबसे व्यावसायिक क्रिकेट माहौल, यानी भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल दौर में हर पारी, हर गलती, हर बयान और मैदान पर हर प्रतिक्रिया कुछ ही मिनटों में करोड़ों लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती है।

कलिनन ने अपने करियर का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी 16 वर्ष की उम्र में दक्षिण अफ्रीका के सबसे युवा प्रथम श्रेणी शतकवीर बने थे, लेकिन उस समय सोशल मीडिया नहीं था और खिलाड़ियों को गलतियां करने तथा सामान्य जीवन जीने की कुछ आज़ादी मिल जाती थी। उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर ने भी 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, लेकिन उस दौर में मीडिया का दबाव आज जितना तीव्र नहीं था।

उन्होंने मनोविज्ञान के ‘फोरक्लोजर’ सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी बच्चे की पहचान बहुत कम उम्र में सिर्फ उसकी उपलब्धियों तक सीमित हो जाती है, तब उसके लिए सामान्य इंसान की तरह विकसित होना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार 15 वर्ष की उम्र में मिली महानता एक ऐसी छवि बना देती है, जिसके भीतर रहकर ही बच्चे को अपनी पूरी जिंदगी बितानी पड़ती है।

कलिनन ने याद दिलाया कि टेनिस ने 1994 में 18 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए सख्त आयु-आधारित नियम बनाए थे, लेकिन क्रिकेट में अभी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो नाबालिग खिलाड़ियों को व्यावसायिक दबावों से बचा सके।

उन्होंने उम्मीद जताई कि वैभव सूर्यवंशी का करियर लंबा और सफल हो तथा उन्हें 25 वर्ष की उम्र में थककर बाहर न होना पड़े, बल्कि वे 40 वर्ष की उम्र तक क्रिकेट खेलें।

अंत में डैरिल कलिनन ने वैभव सूर्यवंशी को सलाह दी कि वे महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर से मार्गदर्शन लें। उन्होंने कहा कि सचिन से बेहतर सलाहकार शायद ही कोई हो सकता है, क्योंकि उन्होंने भी कम उम्र में करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों का बोझ उठाया था और हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया।

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