मिट्टी की कुश्ती के लाल द्रोणाचार्य रोशन लाल का निधन

राजेंद्र सजवान

नई दिल्ली: देश में मिट्टी की कुश्ती को बनाए, बचाए रखने में बड़ी भूमिका का निर्वाह करने वाले भारतीय शैली कुश्ती महासंघ (आईएसडब्ल्यूए) के पूर्व महासचिव रोशनलाल का आज यहाँ निधन हो गया। वह 78 साल के थे। द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित और तीस साल तक रेलवे और भारतीय टीम के कोच एवम् मैनेजर पद का दाइत्व निभाने वाले रोशन लाल ने भले ही अनेकों बार भारतीय कुश्ती टीमों के साथ विदेश दौरे किए लेकिन उन्हें असल पहचान मिट्टी की कुश्ती के चलते मिली।2017 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ कि जिस शख्स ने अपना पूरा जीवन कुश्ती को दिया उसे देश का श्रेष्ठ गुरु अवार्ड दिलाने में मेरी भी छोटी सी भूमिका रही। संयोग से खेल अवार्डों का फ़ैसला करने वाली द्रोणाचार्य और ध्यांचंद अवॉर्ड कमेटी में मुझे भी शामिल किया गया था,जिसके चेयरमैन पुलेला गोपीचन्द थे।

उस कमेटी के अन्य सदस्यों में द्रोणाचार्य महासिंह राव, महाराज किशन कौशिक और वीरेंद्र पूनिया शामिल थे। चूँकि पिछले तीन ओलंपिक खेलों से भारतीय पहलवान लगातार पदक जीत रहे थे इसलिए गोपी सहित कमेटी के सभी सदस्यों ने फ़ैसला किया कि कुश्ती को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।

भले ही रोशनलाल का झुकाव मिट्टी की कुश्ती की तरफ ज़्यादा था किंतु कुश्ती में वह जाने माने हस्ताक्षर थे। तारीफ़ की बात यह है कि खेल मंत्री विजय गोयल ने अगले दिन मुझे अपने घर बुला कर खास कर रोशन लाल के बारे में पूछा और जानना चाहा कि उनकी बड़ी उपलब्धि क्या रही है।

जब मैने उन्हें बताया कि रोशनलाल ऐसे गुरु हैं जिन्होने अनेक एशियाड और ओलंपिक पदक विजेताओं को सिखाया पढ़ाया और सेवाएँ दी हैं और मिट्टी की कुश्ती को दुनिया भर में पहचान दिलाने में भूमिका निभाई है, तो उन्होने कमेटी के फ़ैसले की सराहना की।

इसमें दो राय नहीं कि उनका झुकाव मिट्टी की कुश्ती की तरफ कुछ ज़्यादा था, जिसे उन्होने अनेक लड़ाइयाँ लड़ कर बचाया। देश भर में अपना अलग प्लेटफार्म तैयार किया और तब तक पीछे नहीं हटे जब तक युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने उनके खेल को अलग मान्यता प्रदान नहीं कर दी। भारतीय कुश्ती फ़ेडेरेशन के साथ भी उन्हें कई बार आमने सामने आना पड़ा और कोर्ट में लड़ कर मिट्टी की कुश्ती को मिट्टी में मिलने से बचाया।

भारतीय राष्ट्रीय कुश्ती टीम और रेलवे टीम के कोच के रूप में वह करतार, सतपाल, जगमिंदर, नरेश, रोह्ताश, ज्ञान सिंह, काका पवार, कृपा शंकर, राम आसरे, धर्मवीर, सत्यवान, राजीव तोमर, सुजीत मान, कुलदीप, सुनील जैसे सैकड़ों पहलवानों के साथ जुड़े और सबके प्रिय रहे। देश भर के गुरु ख़लीफाओं में रोशन लाल का नाम बड़े आदर सम्मान से लिया जाता रहा है। ख़ासकर, रेलवे के पहलवान उनके हमेशा शुक्रगुज़ार रहेंगे, जिन्हें नौकरियाँ दिलाने से लेकर चैम्पियन बनाने में उनकी भूमिका शानदार रही।

 

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