भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी ने तकनीक, रक्षा, निवेश और ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने की घोषणा की
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत में पहली आधिकारिक यात्रा पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में ताकाइची का नेतृत्व दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने नारा प्रीफेक्चर का उल्लेख करते हुए भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत को भी रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और जापान का आपसी विश्वास दोनों देशों की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है। उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक जापान ने भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब दोनों देश अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं।
शिखर सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया। भारतीय और जापानी संस्थानों के बीच कई समझौते हुए, जिनका उद्देश्य जापान की प्रिसिजन टेक्नोलॉजी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता को जोड़कर वैश्विक AI विकास को गति देना है। रक्षा क्षेत्र में भारत और जापान के पहले संयुक्त सह-विकास (Co-development) प्रोजेक्ट पर समझौता हुआ। ‘नेवल रेडियो एंटीना’ परियोजना के जरिए दोनों देश रक्षा तकनीक में सहयोग बढ़ाएंगे और क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा तथा नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगे।
फार्मा, मेडिकल डिवाइस और बायोटेक क्षेत्र में भी कई समझौते किए गए। इनका उद्देश्य किफायती, भरोसेमंद और उन्नत स्वास्थ्य समाधान विकसित कर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए व्यापारिक समझौते हुए हैं, जिनके माध्यम से भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक का जापानी निवेश आएगा। दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश और जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में ‘इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव’ के तहत भारत में एक हजार बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने में सहयोग दिया जाएगा। इसके अलावा बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने ‘भारत-जापान नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क’ की भी घोषणा की, जिसके तहत ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सफलता को शिपबिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स तक विस्तारित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-जापान संबंधों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं। टैलेंट मोबिलिटी, कौशल विकास, तकनीकी इंटर्नशिप, शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष भारत और जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत और जापान की यह विशेष साझेदारी विकसित भारत के संकल्प, समृद्ध जापान के विजन और विश्व की प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
