ट्रम्प के दवाब में आया ईरान, अमेरिका के प्रस्तावित शांति समझौते के तहत एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को छोड़ने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। यह समझौता पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित डील की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने लगभग हथियार-स्तर तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के अपने भंडार को हटाने पर सहमति दी है।
हालांकि, इस यूरेनियम को कैसे निष्क्रिय किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बातचीत के अगले दौर में यह तय किया जाएगा कि ईरान इस सामग्री को किसी अन्य देश को सौंपेगा, इसे पतला करेगा या किसी अन्य तरीके से निष्क्रिय करेगा।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में ईरानी सूत्रों ने दावा किया था कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर न भेजने का निर्देश दिया था।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास इस समय लगभग 400 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे हथियार-ग्रेड स्तर के काफी करीब माना जाता है। इज़राइल लंबे समय से दावा करता रहा है कि इस सामग्री को और अधिक शुद्ध कर परमाणु बम बनाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता में साफ कर दिया था कि यदि ईरान शुरुआती समझौते में यूरेनियम भंडार पर प्रतिबद्धता नहीं देता, तो बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है।
इस बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र में भूमिगत रखे यूरेनियम भंडार को निशाना बनाने के विकल्पों पर भी विचार किया था। बताया गया कि बंकर-बस्टर बमों के इस्तेमाल तक की योजना बनाई गई थी। यहां तक कि अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कमांडो कार्रवाई के विकल्प पर भी चर्चा हुई, लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण इसे मंजूरी नहीं दी गई।
संभावित समझौते के तहत 2015 के परमाणु समझौते जैसा मॉडल अपनाया जा सकता है, जिसमें ईरान ने अपना समृद्ध यूरेनियम रूस को भेजा था। एक अन्य विकल्प यूरेनियम की संवर्धन क्षमता को कम करना भी हो सकता है।
आने वाले दौर की वार्ता में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के भविष्य पर भी चर्चा होगी। अमेरिका लंबे समय तक संवर्धन गतिविधियों पर रोक चाहता है, जबकि ईरान कम अवधि की सीमा का प्रस्ताव दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में विदेशों में जमे ईरानी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है। इन फंड्स का अधिकांश हिस्सा अंतिम परमाणु समझौते के बाद ही जारी किया जाएगा।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के 12 सप्ताह बाद भी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे और परमाणु वार्ता एक बार फिर पटरी से उतर गई थी। जवाब में ईरान ने इज़राइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले पड़ोसी देशों को निशाना बनाया, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
