काइली जेनर पर मुकदमा: पूर्व शेफ का आरोप, काम के भारी बोझ के कारण हुआ मिसकैरेज

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: काइली जेनर एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई हैं। उनके खिलाफ यह कामकाजी माहौल से जुड़ा तीसरा मुक़दमा है। इस बार उनकी पूर्व प्राइवेट शेफ़ ने आरोप लगाया है कि इवेंट्स के दौरान बेहद कठिन और शारीरिक रूप से थकाऊ काम करवाए जाने के कारण उनका गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया। इससे पहले भी जेनर की पूर्व हाउसकीपर्स ने अन्य स्टाफ़ सदस्यों के साथ मिलकर कार्यस्थल पर कथित दुर्व्यवहार और खराब व्यवहार को लेकर दो अलग-अलग मुक़दमे दायर किए थे।
22 जून को लॉस एंजिल्स सुपीरियर कोर्ट में दायर इस मुक़दमे के दस्तावेज़, जिन्हें PEOPLE मैगज़ीन ने देखा है, के अनुसार शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपने सुपरवाइज़र्स को पहले ही बता दिया था कि उनकी प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क है। इसके बावजूद उनसे लंबे समय तक लगातार और शारीरिक रूप से बेहद कठिन काम करवाया गया। PEOPLE के मुताबिक, इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए काइली जेनर के प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं आई थी।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने नवंबर 2024 में काइली जेनर के लिए प्राइवेट शेफ़ के तौर पर काम शुरू किया था। गर्भवती होने के बाद उन्होंने अपनी स्थिति को देखते हुए कुछ ज़रूरी सुविधाओं और कार्यस्थल पर सहयोग की मांग की थी। लेकिन आरोप है कि दिसंबर 2024 में उनसे भारी खाने-पीने का सामान ढलान वाले रास्ते से ऊपर ले जाने के लिए कहा गया, जिसके बाद उन्हें मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ा।
मुक़दमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि 1 फरवरी 2025 को काइली जेनर के एक बच्चे की जन्मदिन पार्टी के दौरान भी उनसे लगातार काम कराया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार अतिरिक्त मदद मांगी, लेकिन उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
शिकायत के अनुसार, अगले दिन सुबह उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ। बाद में मेडिकल जांच में पता चला कि उनका गर्भस्थ शिशु नहीं बच सका। महिला का आरोप है कि इस दुखद घटना की जानकारी सुपरवाइज़र्स को देने के बाद भी उन्हें सहयोग नहीं मिला। इसके बजाय उन पर किचन को अस्त-व्यस्त छोड़ने का झूठा आरोप लगाया गया और आखिरकार मार्च 2025 में उन्हें काइली जेनर के घर पर काम से हटा दिया गया।
इस मुक़दमे में मैनेजमेंट फ़र्म ट्राई स्टार को भी प्रतिवादी बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रेग्नेंसी के आधार पर भेदभाव किया गया, ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, शिकायत करने पर बदले की भावना से कार्रवाई की गई और वेतन संबंधी श्रम कानूनों का भी उल्लंघन हुआ।
पूर्व शेफ़ ने अदालत से मुआवज़ा, खोई हुई सैलरी, नौकरी से जुड़े लाभ और अन्य कानूनी राहत देने की मांग की है। उनके वकील का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि यह मुक़दमा उन कर्मचारियों को भी आवाज़ उठाने का हौसला देगा, जो कार्यस्थल पर इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं।
ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा अदालत में दायर मुक़दमे का हिस्सा हैं। मामले की सुनवाई जारी है और अदालत की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
