पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा की सफाई, ‘गलती से हुआ था रेस्ट्रिक्ट’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद मेटा (Meta) ने सफाई जारी की है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि वीडियो को गलती से हटाया गया था और अब उसे दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया है।
मेटा के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा, “यह कंटेंट गलती से हट गया था। अब इसे बहाल कर दिया गया है।”
MeitY ने मेटा के अधिकारी को किया तलब
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी (फेसबुक और इंस्टाग्राम) को तलब किया है। मंत्रालय इस मामले में कंपनी से स्पष्टीकरण मांगेगा कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो को आखिर क्यों प्रतिबंधित किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब यूजर्स वीडियो पर मौजूद “See Why” विकल्प पर क्लिक कर रहे थे, तो फेसबुक की ओर से संदेश दिखाई दे रहा था कि वीडियो को “कानूनी अनुरोध (Legal Request)” के आधार पर सीमित किया गया है। हालांकि, मेटा ने अब स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई जानबूझकर नहीं की गई थी, बल्कि तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण हुई थी। बाद में वीडियो को फिर से सार्वजनिक कर दिया गया।
पेपर लीक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सेल्फी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक ही रात में करीब 10 लाख (1 मिलियन) नए फॉलोअर्स जुड़ गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वीडियो के बाद पीएम मोदी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या करीब 10.1 करोड़ (101 मिलियन) तक पहुंच गई। वीडियो में उन्होंने परीक्षा में पेपर लीक से जुड़े मुद्दे पर छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को संबोधित किया और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
‘पेपर लीक से छात्रों को होती है भारी पीड़ा’
चार दिन पहले जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं से छात्रों और उनके परिवारों को गहरा मानसिक कष्ट होता है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले ढाई महीनों से इस समस्या पर लगातार कार्रवाई कर रही है और इस दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं जानता हूं कि पेपर लीक की घटनाएं छात्रों और उनके माता-पिता के लिए बेहद पीड़ादायक होती हैं।”
उन्होंने बताया कि सरकार ने लगभग 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं समय पर कराने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि 19 जुलाई को परीक्षा परिणाम घोषित किए गए और देशभर से सफल छात्रों की खुशी की खबरें मिल रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल मौजूदा कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पेपर लीक जैसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों को कड़ी सजा देने का प्रस्ताव उन्होंने स्वयं तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, ताकि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।
मेटा की सफाई और MeitY की कार्रवाई के बाद यह मामला अब तकनीकी त्रुटि से आगे बढ़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी संस्थाओं की निगरानी से भी जुड़ गया है।
