संसद से जुड़ी कुछ खास बातें, जानें…

शिवानी रज़वारिया

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति और भारत का संविधान जिस संसद से होकर गुजरते हैं आज हम उसी संसद के कुछ अहम बिंदु पर बात करेंगे। यह तो सभी जानते हैं सियासी दांवपेच हो या संविधान में संशोधन, संसद से होकर ही गुजरते हैं।

लोकतांत्रिक भारत में रहने वाला प्रत्येक नागरिक कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरह भारत की संसदीय व्यवस्था  से जुड़ा है और उसमें किसी न किसी तरीके से अपना योगदान भी देता है। आज हम संसद क्या है संसद में क्या होता है, कैसे वहां काम होता है, इसके बारे में बात करेंगे।आप जिस देश में रहते हैं उस देश के संविधान, उस देश की नीति, उस देश के कानून और कानून बनाने वाली संसद के बारे में आपको जानना आवश्यक हैं। आख़िर हमारा देश चलता कैसे है? प्रत्येक व्यक्ति को ज्यादा नहीं बेसिक नॉलेज तो होनी ही चाहिए।

भारत की संसदीय व्यवस्था को इंग्लैंड से लिया गया है यानी इंग्लैंड में चलने वाली प्रक्रिया को भारत की संसद में अपनाया जाता है।
संसद एक ऐसा स्थान है जहां पर सभी राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों को आमंत्रित करके संसद में बुलाया जाता है और वहां पर जनता की समस्याओं पर एक साथ बैठकर चर्चा की जाती है और उनका समाधान निकालने के लिए सुझाव और प्रस्ताव की मांग की जाती है। जो सदस्य  संसद में बैठकर इन समस्याओं पर चर्चा करते हैं वह सभी जनप्रतिनिधि होते हैं यानी जनता के द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुने गए सदस्य।

जिन्हें जनता चुनकर संसद में भेजती है और यह प्रक्रिया जिस पूरे समय में की जाती है उसे संसद का सत्र कहा जाता है।
संसद के सदस्यों द्वारा जनता के तमाम मुद्दों पर बहस करने और नए प्रस्ताव पर मतदान करके अधिनियम में संशोधन करने के लिए जिस अवधि का निर्धारण किया जाता है उसे संसद का एक सत्र कहा जाता है।
और इस अवधि यानी समय में संसद की सभी प्रकार की कार्यवाही का संचालन होता है और प्रस्ताव पास करके राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता हैं।

सामान्यता 1 वित्त वर्ष में संसद के तीन सत्र का आयोजन होता है। प्रत्येक सत्र के बीच 6 महीने से अधिक का समय नहीं हो सकता है इसकी पुष्टि सविधान में पहले से ही की हुई है।

संसद के सत्र
बजट सत्र (फरवरी से मई)
मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर)
शीतकालीन सत्र अधिवेशन (नवंबर से दिसंबर)

राज्यसभा में बजट सत्र को दो भागो में बांटा गया है इन दोनों भागों के बीच 3 से 4 सप्ताह का अवकाश रहता है इस तरह राज्यसभा के 1 वर्ष में 4 सत्र होते हैं।

संसद भारत का सर्वोच्‍च विधायी निकाय है। राष्‍ट्रपति के पास संसद के दोनों में से किसी भी सदन को बुलाने या स्‍थगित करने अथवा लोकसभा को भंग करने की शक्ति होती है। भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। नए संविधान के तहत भारत में प्रथम आम चुनाव (लोकसभा चुनाव) वर्ष 1951-52  में आयोजित किए गए थे। लोकसभा चुनाव देश के प्रधानमंत्री को चुनने के लिए किए जाते हैं जो 5 साल के अंतराल में आयोजित होते रहते है। प्रथम निर्वाचित संसद अप्रैल, 1952 में अस्तित्‍व में आई, दूसरी लो‍कसभा अप्रैल,1957 में, तीसरी लोकसभा अप्रैल 1962 में, चौथी लोक सभा मार्च 1967 में, पांचवीं लोकसभा मार्च 1971 में, छठी लोकसभा मार्च 1977 में, सातवीं लोकसभा जनवरी 1980 में, आठवीं लोकसभा दिसम्‍बर 1984 में, नौंवी लोकसभा दिसम्‍बर 1989 में, दसवीं लोकसभा जून 1991 में, ग्‍यारहवी लोकसभा मई 1996 में, बारहवीं लोकसभा मार्च 1998 में, तेरहवीं लोकसभा अक्‍तूबर 1999 में, चौदहवीं लोकसभा मई 2004 में तथा पन्द्रहवीं लोकसभा अप्रैल 2009 में अस्तित्‍व में आई। सोलहवीं लोकसभा 2014 में और सत्रहवीं लोकसभा 2017 ।

 

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