सूर्यकुमार की जुझारू पारी से भारत की जीत, अमेरिका को 29 रन से हराकर खिताबी अभियान की शुरुआत

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शनिवार, 7 फरवरी को खेले गए मुकाबले में कप्तान सूर्यकुमार यादव की संयम और साहस से भरी नाबाद 84 रन की पारी की बदौलत भारत ने डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में अपने अभियान की जीत के साथ शुरुआत की। शुरुआती दबाव और लगातार गिरते विकेटों के बीच सूर्यकुमार ने मोर्चा संभाले रखा और भारत को अमेरिका के खिलाफ 29 रन की कड़ी जीत दिलाई।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को बल्लेबाजी के लिए अनुकूल माने जा रहे वानखेड़े के विकेट पर मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा। अमेरिका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और शुरुआत से ही सधी हुई लाइन-लेंथ के साथ भारत को बांधे रखा। बड़े स्कोर की उम्मीदों के उलट भारतीय पारी लड़खड़ा गई और एक समय टीम 13 ओवर में 77 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी।
ऐसे नाजुक मौके पर सूर्यकुमार यादव ने जिम्मेदारी संभाली। घरेलू मैदान के अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए उन्होंने आक्रामकता की जगह धैर्य को चुना। 49 गेंदों में खेली गई उनकी नाबाद पारी में 10 चौके और चार छक्के शामिल थे। आखिरी ओवरों में उनकी तेज रनगति ने भारत को 18 ओवर में 128/7 से उठाकर 161/9 तक पहुंचा दिया, जो अंततः निर्णायक साबित हुआ।
अमेरिका की ओर से शैडली वान शाल्कवाइक ने पावरप्ले में भारत को झकझोर दिया। उछाल और लय की कमी वाले विकेट पर उनकी सटीक गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजों को लगातार असमंजस में रखा। शुरुआती ओवरों में डॉट गेंदों का दबाव साफ नजर आया। अभिषेक शर्मा पहली ही गेंद पर आउट हो गए, जबकि ईशान किशन और तिलक वर्मा अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। हार्दिक पांड्या, रिंकू सिंह और शिवम दुबे भी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
लक्ष्य का पीछा करते हुए अमेरिका की टीम कभी पूरी तरह मुकाबले से बाहर नहीं हुई, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने समय पर शिकंजा कस दिया। मोहम्मद सिराज ने नई गेंद से दो अहम विकेट चटकाए, अक्षर पटेल ने मध्य ओवरों में रनगति पर लगाम लगाई और अंतिम ओवरों में अर्शदीप सिंह ने दबाव में शानदार गेंदबाजी करते हुए अमेरिका को 132/8 पर रोक दिया।
यह भारत का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं था, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में रास्ता निकालने की क्षमता ने अंतर पैदा किया। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पारी और गेंदबाजों के अनुशासित प्रयासों के साथ भारत ने साबित किया कि चैंपियन टीम सिर्फ दमदार खेल से नहीं, बल्कि संकट में संयम से भी पहचानी जाती है।
