बर्नाबेउ से वानखेड़े तक: 24 घंटे में बदली मोहम्मद सिराज की किस्मत, वर्ल्ड कप में धमाकेदार वापसी
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: मोहम्मद सिराज ने फरवरी के लिए अपनी ज़िंदगी की प्लानिंग पूरी तरह तय कर ली थी। 15 फरवरी को सैंटियागो बर्नाबेउ में रियल मैड्रिड का मैच देखना, फिर परिवार के साथ रमज़ान की तैयारियाँ और रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद की कप्तानी के बाद कुछ दिनों का सुकून। टी20 वर्ल्ड कप? वह सपना उन्हें बहुत दूर और किसी और की कहानी लग रहा था।
लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था। महज़ 24 घंटे में सिराज की पूरी दुनिया बदल गई। बर्नाबेउ रुक गया, और भारत की कॉल आ गई।
भारत के टी20 वर्ल्ड कप ओपनर से ठीक एक दिन पहले तक सिराज हैदराबाद में थे। पिछले 18 महीनों से वे देख रहे थे कि कैसे भारत अपनी टी20 टीम को इस टूर्नामेंट के लिए तैयार कर रहा है — और वे उस योजना का हिस्सा नहीं थे। द्विपक्षीय टी20 सीरीज़ में मौका न मिलना उनके लिए एक साफ संकेत था।
प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिराज ने बेबाकी से कहा, “मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं वर्ल्ड कप खेलूंगा। जब मैं टी20 नहीं खेल रहा था, तो समझ गया था कि इस साल मौका नहीं मिलेगा।”
फिर अचानक मैसेज आए। पहले भारतीय सपोर्ट स्टाफ से एड्रियन ले रूक्स का मैसेज — प्लान पूछने के लिए। सिराज ने साफ जवाब दिया, “अभी मैसेज मत कीजिए, मैं आराम कर रहा हूं, दो चार-दिवसीय मैच खेल चुका हूं।”
लेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। भारत के वॉर्म-अप मैच में हर्षित राणा के घुटने में चोट लग गई। रिप्लेसमेंट चाहिए था तुरंत। चयनकर्ताओं की नज़र उस खिलाड़ी पर गई जो पहले ही भारत के 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीत का हिस्सा रह चुका था।
और यहीं से सब कुछ बदल गया।
‘सूर्या भाई, मज़ाक मत करो’
कुछ ही देर बाद फोन बजा। दूसरी तरफ कप्तान सूर्यकुमार यादव थे। “तैयार हो जाओ, बैग पैक करो और आ जाओ,” सूर्या ने कहा। सिराज को यकीन नहीं हुआ। उनका पहला रिएक्शन था, “सूर्या भाई, मज़ाक मत करो, ये नहीं होने वाला।“
लेकिन ये मज़ाक नहीं था। थोड़ी ही देर में टीम मैनेजमेंट का कॉल आया और खबर कन्फर्म हो गई। मुंबई के लिए फ्लाइट बुक हो चुकी थी। रियल मैड्रिड मैच, फैमिली टाइम, रमज़ान की प्लानिंग, सब टल गया।
“15 तारीख को रियल मैड्रिड का मैच था, मैं देखने वाला था,” सिराज ने मुस्कुराते हुए कहा। “लेकिन जो भगवान ने लिखा है, वही होता है।”
वर्ल्ड कप खिलाड़ी बनने के लिए 24 घंटे बहुत कम होते हैं। लेकिन सिराज के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव था। “जब मैं फ्लाइट में बैठा, तो सब सपना जैसा लग रहा था,” उन्होंने कहा।
बिना बदले हथियार, मिला वही नतीजा
तैयारी का वक्त नहीं था। कोई नई रणनीति नहीं। सिराज ने वही करने का फैसला किया, जो उनके लिए हमेशा काम करता आया है।
“मैंने वही लाइन-लेंथ रखी, जो रणजी में डाल रहा था,” सिराज ने बताया। “नई गेंद से विकेट-टू-विकेट बॉलिंग, यही प्लान था। अगर शुरुआत में विकेट मिल जाए, तो टीम को फायदा होता है।” और यही हुआ।
अमेरिका के खिलाफ सिराज की तीन विकेट की घातक गेंदबाज़ी भारत की जीत की नींव बनी। चयनकर्ताओं का भरोसा सही साबित हुआ, और खुद सिराज को भी अपने तरीके पर यकीन मिल गया।
मैच से एक रात पहले नींद भी ठीक से नहीं आई, लेकिन दिमाग बिल्कुल साफ था। “मैंने सोचा, जिस हथियार ने मुझे यहां तक पहुंचाया है, उसी पर भरोसा करूंगा,” उन्होंने कहा।
यह प्रदर्शन इसलिए भी खास था क्योंकि भारत पहले ही 77 रन पर 6 विकेट गंवा चुका था। कप्तान सूर्यकुमार यादव की नाबाद 84 रन की पारी से भारत 161/9 तक पहुंचा। इसके बाद नई गेंद से सिराज के शुरुआती झटकों ने मुकाबले की दिशा तय कर दी।
‘भगवान ने मेरी किस्मत बदल दी’
जिस खिलाड़ी को भरोसा नहीं था कि वह इस वर्ल्ड कप का हिस्सा बनेगा, वही खिलाड़ी अब भारत की अहम जीत का नायक बन गया। “जो भगवान ने लिखा है, उसे कोई नहीं बदल सकता,” सिराज ने भावुक होकर कहा। “मैं आया, मैच खेला, सब पहले से लिखा था।”
वर्ल्ड कप में 24 घंटे की नोटिस पर आकर मैच जिताने वाला यह पल मोहम्मद सिराज के करियर में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
