क्या शरद पवार के सियासी गुगली में फंसेंगे उद्धव-कांग्रेस ?

 

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र के सियासत में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मुलाकात के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस मुलाकात पर जारी सियासी अटकलबाजियों पर विराम लगाने के लिए संजय राउत को सामने आना पड़ा और उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में हमारी सरकार मजबूत है। बता दें कि सोमवार की शाम को मातोश्री में उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच मुलाकात हुई थी। दरअसल, सोमवार की शाम में दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक मुलाकात का दौर चला था, जिसके सरकार की स्थिरता पर अटकलें तेज हो गईं। इसके बाद संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार की स्थिरता के बारे में अटकलों को खारिज किया। हालांकि, उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि आखिर दोनों नेताओं के बीच किस मुद्दे पर बातचीत हुई। उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच यह बैठक एनसीपी प्रमुख द्वारा सोमवार सुबह राज्य के राज्यपाल बी एस कोश्यारी से मुलाकात के ठीक बाद हुई। यही वजह है कि महाराष्ट्र की सियासत में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। संजय राउत ने ट्वीट कर कहा, शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने कल मातोश्री पर मुलाकात की। दोनों नेताओं ने करीब डेढ़ घंटे से अधिक तक बातीचत की, अगर कोई खबर फैला रहा है कि महाराष्ट्र की सरकार संकट में है तो उसके पेट में दर्द है।

देश के 36 फीसदी से ज्‍यादा कोविड-19 केस अकेले महाराष्‍ट्र से हैं। महाराष्‍ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की संयुक्‍त सरकार है और उद्धव ठाकरे मुख्‍यमंत्री हैं। विपक्ष इस हालत के लिए सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। इस बीच महाराष्‍ट्र में सियासी संकट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ताजा हलचल इसी ओर इशारा करती है। मंगलवार को एक ओर जहां एनसीपी चीफ शरद पवार ने उद्धव से मुलाकात की। वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्‍ट्र में सरकार का साथ तो दे रही है मगर ‘की डिसिजन मेकर’ नहीं हैं।

राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में साफ किया कि महाराष्‍ट्र सरकार को कांग्रेस सपोर्ट कर रही है। वहां पार्टी की बड़े फैसलों में भूमिका नहीं है, यह कहकर राहुल ने ‘महाविकास आघाडी’ की एकजुटता को लेकर अटकलों को हवा दे दी है। राहुल ने कहा, “हम महाराष्‍ट्र में सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं मगर वहां ‘की डिसिजन मेकर’ नहीं हैं। हम पंजाब, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान, पुदुचेरी में ‘की डिसिजन मेकर’ हैं। सरकार चलाने और सरकार का सपोर्ट करने में फर्क होता है।”

राहुल गांधी ने यह भी बताया कि महाराष्‍ट्र, दिल्‍ली जैसी जगहों पर कोरोना वायरस का प्रकोप इतना ज्‍यादा क्‍यों हैं। उन्‍होंने कहा, “जितनी ज्‍यादा कनेक्‍टेड जगह है, वहां कोरोना ज्‍यादा एग्रेसिव हैं। आप दिल्‍ली देखें, मुंबई देखें, पुणे देखें। महाराष्‍ट्र भारत के सबसे कनेक्‍टेड राज्‍यों में से एक है इसलिए वहां पर कोरोना के ज्यादा मामले होंगे ही।” उन्‍होंने कहा कि महाराष्‍ट्र अपनी कनेक्टिविटी के नेचर की वजह से इतना संघर्ष कर रहा है। राहुल के मुताबिक, महाराष्‍ट्र बिजनेस का सेंटर है इसलिए केंद्र सरकार को उसे पूरी तरह से सपोर्ट करना चाहिए।

शिवसेना के सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि की स्थिरता को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने पुष्टि की कि पवार ने उद्धव से मुलाकात की है। ऐसी अटकलें हैं कि कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीके को लेकर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। राउत ने संभावित राजनीतिक संकट की ओर इशारा करते हुए कहा, “विपक्ष को अभी भी कोरोना के लिए टीका और उद्धव ठाकरे की सरकार को गिराने के लिए खुराक खोजना बाकी है लेकिन प्रयास जारी हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार मजबूत है और उस पर कोई खतरा नहीं है।

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