TCS नासिक मामला गरमाया: यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण के दावों और मलेशिया कनेक्शन से जुड़ी पूरी जानकारी
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के नासिक शहर में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के एक कार्यालय से जुड़ा मामला इन दिनों बड़े विवाद का विषय बन गया है।
फरवरी महीने में एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता द्वारा की गई शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी में कार्यरत एक हिंदू महिला रमज़ान के दौरान रोज़े रख रही थी और उस पर धार्मिक प्रभाव डाला जा रहा था। इसी शुरुआती सूचना के आधार पर पुलिस ने TCS कार्यालय में एक गुप्त ऑपरेशन चलाया।
जांच के दौरान पुलिस को जो जानकारी मिली, उसने मामले को गंभीर बना दिया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों पर सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और मानसिक दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आए हैं। बताया गया कि WhatsApp चैट के जरिए मिले सुरागों के आधार पर जांच में यह भी सामने आया कि मलेशिया से जुड़े एक उपदेशक ‘इरमान’ को वीडियो कॉल के माध्यम से कुछ कर्मचारियों से जोड़ा गया था।
इस मामले में पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तार और एक अन्य कर्मचारी अश्विन चैनानी शामिल हैं। वहीं HR मैनेजर निदा खान अभी फरार बताई जा रही हैं, और उनकी भूमिका की भी जांच जारी है।
पुलिस ने यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े कम से कम नौ FIR दर्ज किए हैं। इसके साथ ही एक ACP स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जो आठ महिला कर्मचारियों की शिकायतों की जांच कर रही है। इन महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके वरिष्ठ सहकर्मियों ने उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया, जबकि HR विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी इस मामले में सामने आई है। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” करार दिया है। TCS ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती के प्रति “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति अपनाती है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों पर आरोप हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें किसी बाहरी स्रोत से आर्थिक सहायता मिली थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर पीड़ित महिलाएं 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग की हैं, जिनकी मासिक आय 18,000 से 25,000 रुपये के बीच बताई जा रही है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक शिकायत में जिस महिला का जिक्र था, उसके परिवार ने बताया कि जब उन्होंने अपनी बेटी के व्यवहार में बदलाव देखा—जैसे रमज़ान के दौरान रोज़ा रखना और जीवनशैली में परिवर्तन—तो उन्होंने उसे कार्यालय भेजना बंद कर दिया था।
फिलहाल, पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
